एनआईटी पटना।

पटना एनआईटी में बनेगा इसरो का सेंटर, अब स्पेस में केवल भारतीय प्रोडक्ट का होगा प्रयोग

पटना : पटना एनआईटी में इसरो ने अपना रिसर्च सेंटर खोला है। रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेस (आरएसीएस) को लेकर पटना एनआईटी और इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन इसरो बेंगलुरु के साथ एक एमओयू साइन हुआ है। इसरो के डायरेक्टर सुधीर कुमार एन ने कहा कि एनआईटी पटना का बेहतर प्रदर्शन और एमएचआरडी रैंकिंग के कारण इसरो बना सेंटर यहां स्थापित कर रहा है। सुधीर ने कहा कि पूरे जोन के रिसर्च प्रोजेक्ट अब एनआईटी पटना के जरिए पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें पटना एनआईटी से बेहतर संस्थान नहीं मिला। अब हमें रिसर्च के मामले में पुराने तरीकों की सोच से आगे निकलकर प्रैक्टिकल तरीके से काम करना होगा। कहा कि अब रिसर्च में भी इनोवेशन लाना हेगा। इसमें पटना एनआईटी की भागीदारी अच्छी होगी। आने वाले जेनरेशन के लिए आज से ही नींव रखनी होगी, नहीं तो वो हमें माफ नहीं करेंगे।

एमओयू साइन करते दोनों संस्थान के निदेशक।

पूर्वी क्षेत्र में अंतरिक्ष अनुसंधान का मेंटर संस्थान बनेगा
पटना एनआईटी के निदेशक प्रो. पीके जैन ने कहा कि इस सेंटर के बनने के बाद पटना पूर्वी क्षेत्र में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए यह मेंटर संस्थान बन जाएगा। इसरो के एसोसिएट डायरेक्टर रिस्पॉन्स एंड एआई सीबीपीओ के डॉ. एमए पॉल ने कहा कि इस सेंटर की स्थापना के बाद स्पेस में केवल भारतीय प्रोडक्ट का इस्तेमाल होगा। इस सेंटर से बिहार के अलावा बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, झारखंड, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के संस्थान के फैकल्टी और छात्र स्पेस से जुड़ी रिसर्च सुविधापूर्वक कर पाएंगे। बता दें बीटेक, एमटेक आर पीएचडी के विद्यार्थी रिसर्च के लिए आइडिया दे सकेंगे। ये सभी अपने प्रोजेक्ट आइडिया फैकल्टी के जरिए जमा करेंगे। कॉलेज से पास आउट होने के बाद भी उनका प्रोजेक्ट नहीं रुकेगा। इसमें दो तरह के प्रोजेक्ट होंगे। एक साल का शॉर्ट टर्म प्रोजेक्क्ट और दूसरा एक साल से अधिक समय का। एनआईटी पटना के डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रो. मनपुरन महतो ने कहा कि पिछले एक साल से वह और उनकी टीम टाइअप करने में लगी थी। एक साल से ऑनलाइन एनआईटी पटना का विजिट करके सर्वेक्षण किया गया है।

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