बार-बार पढ़ाई को लेकर तेजस्वी को घेर रहे मांझी, फिर कहा- पहले पढ़ लिख लें

पटना
जीतनराम मांझी जबतक महागठबंधन का हिस्सा थे तबतक तेजस्वी की पढ़ाई लगता है ठीक थी। अब अचानक तेजस्वी यादव की पढ़ाई गड़बड़ा गई है। यह हम नहीं, जीतनराम मांझी के हालिया बयान कह रहे हैं। कभी वो तेजस्वी को आठवीं पास बता रहे हैं तो कभी पढ़ने-लिखने की सलाह दे रहे हैं। जीतनराम मांझी ने एक बार फिर कहा है कि तेजस्वी यादव को कानून का ज्ञान नहीं है। पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने जब से नीतीश संग जाने का ऐलान किया है तबसे ही वो तेजस्वी पर खासे हमलावर नजर आ रहे हैं।

ताजा मामला एससी-एसटी वर्ग के मृतकों के परिजनों को लेकर किए गए नीतीश कुमार के ऐलान से जुड़ा है। असल में नीतीश कुमार ने ऐलान किया है कि एससी-एसटी व्यक्ति की हत्या होने पर उनके एक स्वजन को नौकरी दी जाएगी। तेजस्वी ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। तेजस्वी ने कहा है कि अन्य पिछड़ी, अति पिछड़ी और सवर्ण जातियों के लिए ये प्रावधान क्यों नहीं है?

तेजस्वी ने आगे कहा कि बिहार सरकार का ये फैसला तो एक तरह से हत्या को बढ़ावा देने वाला है। मांझी तेजस्वी के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए एक बार फिर उनकी पढ़ाई लिखाई तक पहुंच गए हैं। मांझी ने कहा है कि ये कानून 1990 का है और नीतीश तो केवल इसे प्रभावी बना रहे हैं। उन्होंने कहा है कि किसी को इसमें परेशानी है तो वह केंद्र से बात करे। लगे हाथ मांझी ने तेजस्वी का नाम लिए बिना कहा कि उन्हें पहले पढ़-लिख लेना चाहिए। उनको कानून की जानकारी नहीं है।

आपको बता दें कि मांझी महागठबंधन से अलग हो गए हैं। अब उन्होंने नीतीश का दामन थाम लिया है। हालांकि इस नए मेल में मांझी को कितनी सीटें मिलने वाली हैं, ये अभी भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है। चर्चाएं ऐसी भी थीं कि मांझी की पार्टी के कुछ कैंडिडेट जदयू के चुनाव चिह्न पर भी लड़ सकते हैं। हालांकि सीट शेयरिंग का मामला एनडीए और महागठबंधन, दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

एनडीए में जहां चिराग पासवान दबाव की राजनीति की राह पर हैं तो मांझी को भी उनका हिस्सा पूरा चाहिए। ठीक इसी तरह महागठबंधन में मुकेश साहनी की पार्टी VIP भी 25 सीटों की मांग कर रही है। इसी तरह महागठबंधन में अभी रालोसपा औऱ लेफ्ट पार्टियों को मिलने वाली सीटों को लेकर भी मंथन होना है। यानी कुल मिलाकर देखें तो सीट शेयरिंग की राह अभी किसी के लिए आसान नहीं दिख रही है।

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