जय प्रकाश नारायण। Image Source : oldphotos.in

जेपी : एक युवा जिसने अंग्रेजों के विरोध में ब्रिटिश स्कूल को छोड़ विद्यापीठ से अपनी शिक्षा पूरी की

New Delhi : जालियांवाला बाग जहां अंग्रेजों ने हमारे 400 से अधिक देशवासियों को गोलियों से भुनवा दिया। इसका देश भर में विरोध हुआ। इसी विरोध में 11 अक्टूबर 1902 को सिताबदियारा बिहार में जन्में जयप्रकाश नरायण ने ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल को छोड़ दिया। उसके बाद उन्होंने अपनी शिक्षा बिहार बिद्यापीठ से पूरी की। उस समय ब्रिटिश स्कूल में पढ़ना किसी युवा के लिये सपना होता था। लेकिन जेपी ने अंग्रेजों के स्कूल का त्याग कर दिया। उसके बाद जेपी ने ब्रिटिश हुकूमत का कई मौको पर विरोध किया। साल 1932 में उन्हें अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के लिये एक साल की सजा सुनाई गई। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन चलाने के लिये उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा।

जेपी नहीं चाहते थे कोई अंग्रेज अपने फायदे के लिये भारतीयों का इस्तेमाल करे- द्वितीय विश्व युद्ध 1939 से 1945 के बीच चला। इस युद्ध में अंग्रेज भी हिस्सा ले रहे थे। इस युद्ध के समय अंग्रेज हमारे लोग और संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे थे। जिसका जेपी ने खुलकर विरोध किया। इस विरोध के कारण वर्ष 1939 में एक बार फिर उन्हें जेल में डाल दिया गया।
जेपी चाहते थे कि राजनीति गरीबी खत्म करने के लिये हो- जेपी चाहते थे कि हमारा लोकतंत्र साफ-सुथरा रहे। राजनीति में धनबल और चुनाव का खर्चा कम हो। ताकि नेता चुनाव जीतने के बाद पैसा न कमायें। गरीबों की सेवा करें, सबके थाली तक भोजन पहुंचाएं। जेपी यह भी चाहते थे कि महिला और पुरूष के बीच किसी तरह का भेदभाव न हो। किसी से उसकी जाति के आधार पर भेदभाव न किया जाये। उनका मानना था कि सार्वजनिक हितों के सामने व्यक्तिगत हित को तरहीज नहीं दी जानी चाहिये। सार्वजनिक हित को ही सर्वोपरि मानने से देश का विकास होगा। यही वजह है कि मरणोपरांत स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने, गरीबों और दलितों के उत्थान के लिये जीवन समर्पित कर देने वाले जेपी को देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।
आजादी के बाद भी जेल गये- 1975 में इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा देश में आंतरिक आपात काल की घोषणा की गई। जिसका जेपी ने जमकर विरोध किया। जिसकी वजह से उन्हें और कई विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इसी आंदोलन के बाद उन्हें लोकनायक कहा गया।

जयप्रकाश नारायण मूल रूप से एक लोकतांत्रिक समाजवादी थे और व्यक्ति की स्वतंत्रता को सर्वोपरि मानते थे। वह भारत में ऐसी सामाजिक व्यवस्था के समर्थक थे जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानसिक प्रतिष्ठा और लोक कल्याण के आदर्शों के अनुरूप हो। 1974 में उन्होंने संपूर्ण क्रांति की शुरुआत की। अपने सपने को पूरा करने के लिए जयप्रकाश ने ‘छात्र युवा संघर्ष वाहिनी’ की स्थापना कर अहिंसक तरीके से भ्रष्टाचार के खिलाफ जन आंदोलन का नेतृत्व किया।
1977 के लोकसभा चुनाव में जेपी ने विपक्षी दलों को एक करके चुनाव लड़वाया। और भारी बहुमत से देश में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी। देश का नेतृत्व करने वाले जेपी की किडनी खराब हो गई। भारत मां के इस वीर सपूत का बिहार के पटना में 8 अक्टूबर 1979 को निधन हो गया। देश ने लोकतंत्र का एक सतर्क प्रहरी खो दिया।

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