बिहार के युवक ने अमरूद में इस्तेमाल की ‘मसाज तकनीक’, कमाने लगे लाखों रुपये

पटना

अगर आपको लगता है कि खेती-किसानी पुराने ढर्रे पर ही की जा रही है तो आप गलत हैं। अगर आपको लगता है कि खेती में नए प्रयोग नहीं हो रहे हैं तो आप गलत हैं। अगर आपको लगता है कि लोग आज भी नौकरी की बजाय खेती का चुनाव नहीं कर रहे तो भी आप गलत हैं। खेती अब वो नहीं रही जिसके बारे में ये कहा जाता था कि खेती में अब निबाह नहीं। अगर आप प्रयोगधर्मी हैं तो खेती आज भी कमाई और स्वरोजगार के सबसे सशक्त साधनों में से एक है। और इस बात को सही साबित किया है कि किशनगंज के एक युवक मोहम्मद रफीक ने।

मसाज तकनीक से पहले रफीक की कहानी जान लीजिए

आपने शीर्षक में अमरूद की मसाज तकनीक के बारे में पढ़ा। इस तकनीक के बारे में हम आपको बताएंगे लेकिन सबसे पहले आपको किशनगंज के इस सफल युवा किसान मोहम्मद रफीक की कहानी बता देते हैं। रफीक केवल आठवीं तक पढ़े हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पिता के कामों में हाथ बंटाना पड़ा लेकिन पारंपरिक खेती का काम आगे बढ़ने के लिए काफी नहीं था। इस बीच रफीक को बंगाल जाने का मौका मिला, जहां उन्होंने अमरूद की खेती होते देखी। रफीक ने फैसला किया कि लौटकर वह भी अमरूद की खेती करेंगे।

गांव की जमीन को ही लिया लीज पर

रफीक ने अपने गांव लौटकर पहले कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क किया। उन्होंने अमरूद की खेती की सारी जानकारी जुटाई। इसके बाद गांव में ही 8 बीघे की जमीन को लीज पर लिया। रफीक बंगाल के नादिया से अमरूद के पौधे लेकर आए थे। उन्होंने शुरुआत में 800 से अधिक पौधे लगाए। काफी पौधे खराब हुए। लेकिन पांच-छह साल की लगातार मेहनत आखिरकार रंग लाने लगी। रफीक बताते हैं कि एक-डेढ़ बीघे की खेती से सालाना डेढ़ से 2 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है।

मसाज तकनीक से बढ़ी अमरूद की पैदावार

मोहम्मद रफीक ने अमरूद की खेती के लिए नई नई तकनीक को भी समझा और इसे अपनाया। इसी तरह की एक तकनीक है मसाज या ट्विस्टिंग तकनीक। इसमें अगस्त और सितंबर महीने में अमरूद की नई शाखाओं में लगी ऊपर की कुछ पत्तियों को छोड़ नीचे की सारी पत्तियां हटा देते हैं। फिर शाखा को नीचे की तरफ झुकाते हुए बाएं से दाएं हल्का सा मरोड़ देते हैं। चट की आवाज आए तो मसाज या ट्विस्टिंग को पूरा माना जाता है। ऐसा हो जाने कुछ समय बाद टहनियों के हर नोड से नए फूल आते हैं और फल लगते हैं।

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