लालू प्रसाद यादव की फाइल फोटो। Image Source : Agencies

लालू बोले- तीसरे डिवीजन में परीक्षा पास कर नीतीश बने सीएम, नैतिकता, लोक मर्यादा ताक पर तो अब लो मजा

Patna : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज करते हुये राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि जद (यू) नेता ने “थर्ड डिवीजन के साथ परीक्षा पास की” और दूसरों के रहमो करम पर बिहार के मुख्यमंत्री बन बैठे। यह टिप्पणी 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल-यूनाइटेड (जेडी-यू) द्वारा जीती गई सीटों के संदर्भ में की गई है। खासकर समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी के इस्तीफे की पेशकश के बाद बने हालातों को देखते हुये। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जद-यू पिछले साल के विधानसभा चुनाव में केवल 40 सीटें हासिल करने में सफल रही। चुनाव में सबसे अधिक सीट जीत कर राजद पहले, भारतीय जनता पार्टी दूसरे और जदयू तीसरे स्थान पर रही थी। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को 75 सीटें मिलीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 74 सीटें मिलीं थीं।

 

लालू प्रसाद ने कहा- नीतीश नैतिकता और जनादेश को दरकिनार कर बिहार के मुख्यमंत्री बने… इसका नतीजा अब उनके अपने विधायकों और मंत्रियों द्वारा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने लिखा- गिरते-पड़ते, रेंगते-लेटते, धन बल-प्रशासनिक छल के बलबूते जैसे-तैसे थर्ड डिविज़न प्राप्त 40 सीट वाला जब नैतिकता, लोक मर्यादा और जनादेश को ताक पर रखकर मुख्यमंत्री बनता है तब ऐसा होना स्वाभाविक है। लालू का यह बयान ऐसे समय आया है जब नीतीश कुमार को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है कि सरकार में अफसरों की सत्ता है और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की जाती है।
वे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी का जिक्र कर रहे थे, जिन्होंने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। मंत्री ने अपने विभाग के प्रमुख सचिव अतुल प्रसाद पर भी गंभीर आरोप लगाये थे। लालू प्रसाद ने मदन साहनी का वीडियो बयान शेयर करते हुये ट्वीट किया- उन्होंने नौकरशाही और धनबल का इस्तेमाल कर किसी तरह थर्ड डिवीजन से चुनाव जीता। अच्छी और बुरी सरकार का सवाल ही नहीं है। साहनी ने समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अतुल प्रसाद पर गंभीर आरोप लगाये हैं। उन्होंने कहा कि शीर्ष नौकरशाह विभाग चलाने के उनके सुझाव की अनदेखी कर रहे हैं।
साहनी और प्रसाद के बीच विवाद सीडीपीओ व विभाग के अन्य अधिकारियों की तबादला पोस्टिंग को लेकर हुआ है। साहनी अपनी पसंद के अनुसार अधिकारियों की तबादला-तैनाती चाहते थे। नियमों के अनुसार, अधिकारियों का फेरबदल तभी संभव हो सकता है जब किसी अधिकारी ने एक ही स्थान पर 3 साल या उससे अधिक समय पूरा कर लिया हो। प्रसाद ने उनकी सिफारिशों को खारिज कर दिया। यही उनके और प्रसाद के बीच विवाद का वास्तविक कारण था, जिसके परिणामस्वरूप जून के महीने में तबादले नहीं हुये। बिहार में जून और दिसंबर स्थापना का महीना होता है। इसमें मंत्री की अध्यक्षता में स्थापना समिति अफसरों के तबादले का निर्णय लेती है।

 

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