लालू प्रसाद यादव की फाइल फोटो

लालू बोले- रीढ़विहीन हैं नीतीश कुमार, नेता कभी रिटायर नहीं होता, आखिरी पायदान पर खड़े लोगों को ऊपर उठाने का काम करता रहूंगा

Patna : आज राष्ट्रीय जनता दल के 25वें स्थापना दिवस को लेकर पूरे प्रदेश में कई कार्यक्रम किये जायेंगे। राजद सुप्रीमो ललू प्रसाद भी वर्चुअली पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से बात करेंगे। इससे पहले लालू प्रसाद ने दैनिक भास्कर से बात करते हुये कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रीढ़विहीन व्यक्ति हैं। भविष्य में कभी जदयू और राजद में गठबंधन हो सकता है या नहीं के सवाल पर कहा कि यह सवाल पूरी तरह से काल्पनिक है। 2015 में हमने तमाम अंतर्विरोधों को दरकिनार कर महागठबंधन को जीत दिलाई। ज्यादा सीटें जीतीं। फिर भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया। नीतीश ने पौने दो साल बाद ही उस अभूतपूर्व जनादेश के साथ क्या किया? सबने देखा। राजनीति में सिद्धांत, नीति, नियति और रीढ़ की हड्डी का महत्व अधिक है जो नीतीश खो चुके हैं।

लालू प्रसाद ने वर्ष 1997 में जनता दल से अलग होकर राजद बनाया था। विपक्ष के आरोपों और कोर्ट-कचहरियों का सामना करते-करते उन्होंने अपनी सरकार बनायी, बचायी और विपक्ष में रहने पर भी राजद की ताकत बनाये रखी। जमानत के बाद दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ कर रहे लालू ने दैनिक भास्कर के एक सवाल आप मार्गदर्शक की भूमिका में ही बने रहेंगे या राजनीति में फिर सक्रिय होंगे? के जवाब में कहा- नेता कभी रिटायर नहीं होता। राजनीतिक सक्रियता का अर्थ सिर्फ संसद और विधानसभाओं का चुनाव ही है क्या। मेरी राजनीति खेत-खलिहानों से लेकर सामाजिक न्याय और आखिरी पायदान पर खड़े लोगों को ऊपर उठाने की रही है जो आज भी जारी है। मार्गदर्शक तो ऊ हाफ पैंट वालों का कॉपीराइट है। हम तो गरीब-गुरबा के अधिकारों की लड़ाई के लिए पैदा हुए हैं और आखिरी सांस तक उनके लिये सक्रियता से लड़ते रहेंगे।
उनसे जब पूछा गया कि 2024 में मोदी का विकल्प कौन हो सकता है? तो लालू प्रसाद बोले- जो भी चेहरा होगा वो तानाशाही, अहंकार और आत्म-मुग्धता से कोसो दूर होगा। मोदी का विकल्प उनकी जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ एक प्रगतिशील एजेंडा ही हो सकता है। एक बार जब वैकल्पिक कार्यक्रम को लोग स्वीकार कर लेते हैं तो चेहरे का संशय समाप्त हो जाता है। पिछले 6 साल के शासन से तय हो गया कि आत्म-केन्द्रित व व्यक्ति-केन्द्रित शासन लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत नहीं कर सकता।
लालू-राबड़ी के 15 साल बनाम नीतीश के 15 साल को किस रूप में देखते हैं? के जवाब में उन्होंने कहा – यह तुलना बिना पूर्वाग्रह के आने वाला इतिहास करेगा। 1990-2005 के शासन काल का सामाजिक आर्थिक विश्लेषण करते हुये हमारी परफॉर्मेंस का आकलन करना होगा तब जाकर असली बात समझ में आयेगी। विकास का प्रथम सूचकांक मानव विकास होता है। जिस गैर-बराबरी समाज में उच्च कुल-जात का व्यक्ति मात्र जन्म के आधार पर दूसरे को नीचा समझता है, उस समाज में बड़ी-बड़ी बिल्डिंग, पुल-पुलिया और हवाई अड्डे के बखान का क्या फायदा। पहले सभी को समान शिक्षा और स्वास्थ्य देना होगा। वंचित, उपेक्षितों को उनका हिस्सा देना होगा। हमने वही किया। वहीं नीतीश के 2005-2021 के कार्यकाल का प्रोपगंडा आधारित गवर्नेंस का सच अब पूरा देश जान चुका है। नीतीश के मंत्री-विधायक भी उनकी कार्यशैली का काला सच सामने ला रहे हैं। 90 के दशक की सबसे बड़ी जरूरत पिछड़ों और दलितों को उनका सम्मान और हक दिलाना था, जो हमने दिया। विरोधी भी दबी जुबान से ये उपलब्धि मानते हैं।

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