चिराग पासवान, शरद यादव और लालू प्रसाद। Image Source : tweeted by @SharadYadavMP and @LJP4India

लालू- बिहार में तेजस्वी-चिराग को साथ चाहता हूं : चिराग- उनकी भावनाओं का सम्मान करता हूं लेकिन …

Patna : संकट में घिरे लोजपा नेता चिराग पासवान ने मंगलवार को राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद से मिले समर्थन के लिये उनका आभार व्यक्त किया। हालांकि अविभाजित लोजपा के प्रमुख ने लालू प्रसाद के सुझाव के बारे में सवालों को टाल दिया कि चिराग को उनके बेटे तेजस्वी यादव के साथ मिलकर काम करना चाहिये, जो राजद और राज्य के उभरते सितारे हैं। चिराग बोले- लालू जी के मेरे पिता और राजनीतिक गुरु रामविलास पासवान के साथ मधुर संबंध थे। मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करता हूं लेकिन मेरी प्राथमिकता ‘आशीर्वाद यात्रा’ है और मुझे अपने संगठन को मजबूत बनाना है। बिहार या उत्तर प्रदेश में गठबंधन पर कोई भी चर्चा चुनाव के नजदीक होगी। मैं अपने नेतृत्व पर उनकी तरफ से भरोसा दिखाने के लिये उनका धन्यवाद देता हूं।

 

वह लालू प्रसाद द्वारा की गई टिप्पणी के बारे में पूछे गये सवालों का जवाब दे रहे थे, जो इस साल की शुरुआत में जेल से रिहा होने के बाद से दिल्ली में हैं। यह टिप्पणी कि लोजपा में संकट ने वास्तव में एक नेता के रूप में चिराग को स्थापित कर दिया है, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नियंत्रित जद (यू) के पूर्व अध्यक्ष, अनुभवी समाजवादी नेता शरद यादव के साथ दिल्ली में हुई एक बैठक के बाद लालू द्वारा की गई। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने चिराग पासवान-तेजस्वी यादव के गठबंधन के मसले पर सवाल पूछे जाने पर कहा था- लोक जनशक्ति पार्टी में जो कुछ भी हुआ हो, चिराग पासवान लोजपा के नेता बने हुये हैं। हां, मैं उन्हें… बिहार में एक साथ देखना चाहता हूं।
जमुई के सांसद को उनके चाचा पशुपति कुमार पारस, चचेरे भाई प्रिंस राज और अन्य लोजपा सांसदों द्वारा किये गये विद्रोह के बाद उनकी ही पार्टी से बेदखल कर दिया गया। विद्रोही गुट, जिसे लोकसभा अध्यक्ष द्वारा मान्यता दी गई है, हालांकि इस कदम को चिराग द्वारा चुनौती दी गई है, ने अपने दिवंगत संस्थापक अध्यक्ष के बेटे को पिछले साल विधानसभा चुनावों में पार्टी की खराब स्थिति के लिये दोषी ठहराया है। चिराग ने चुनाव से पहले एनडीए से हाथ खींच लिया था और दावा किया था कि बिहार के लोग नीतीश कुमार से तंग आ चुके हैं और नेतृत्व में बदलाव के लिये तरस रहे हैं।
हालाँकि उन्होंने विरोधाभासी रूप से भाजपा और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति वफादार होने का दावा किया था। बिहार में नीतीश कुमार की अपरिहार्यता के कारण भाजपा ने खुद को जुझारू और यंग चिराग पासवान से दूर कर लिया है। चिराग को अपनी पार्टी के विभाजन में जद (यू) का हाथ होने का संदेह रहा है। उन्होंने सोमवार को आरोप लगाया कि पेगासस, जनसंख्या बिल और जाति जनगणना जैसे मुद्दों पर नीतीश कुमार के हालिया रुख और जद (यू) के कुछ नेताओं के दावे कि बिहार के मुख्यमंत्री पीएम मैटेरियल है ने साफ कर दिया है कि जदयू क्या कर रहा है।

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