सरकारी नौकरी छोड़ खेती से मालामाल हुआ बिहार का लाल, मोबाइल मैसेज से होती है सिंचाई

पटना

आजकल हर कोई नौकरी के लिए जद्दोजहद कर रहा है। सरकारी नौकरी की बात छोड़िए लोग प्राइवेट नौकरियों के लिए अपना घर बार छोड़ महानगरों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में कोई अपनी सरकारी नौकरी छोड़ खेती का रुख करे तो आप क्या कहेंगे। आपको लग सकता है कि अरे ये कैसा फैसला हुआ। लेकिन खेती सफल हो जाए तब आप क्या कहेंगे। ऐसी ही कुछ कहानी है बिहार के गया जिला निवासी प्रभात कुमार की। प्रभात सरकारी इंजीनियर थे लेकिन देश के कई गांवों में भ्रमण से उन्हें खेती की एक नई विधि का पता चला, जिससे प्रेरित होकर वह नौकरी छोड़ इसमें उतर पड़े।

गुजरात की पीएसयू में थी सरकारी नौकरी

आपको बता दें कि प्रभात कुमार गया के छोटकी डेल्हा मोहल्ले के रहने वाले हैं। उन्होंने बंगाल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह गुजरात के एक पीएसयू में सरकारी नौकरी करने लगे। इस बीच प्रभात ने एक संस्थान द्वारा कई गांवों का भ्रमण किया। गांवों में उन्होंने किसानों की समस्याएं देखने का मौका मिला। इसके अलावा वह खेती की नई तकनीकों से भी परिचित हुए।

खेती के इस मॉडल से प्रभावित होकर छोड़ दी नौकरी

प्रभात कुमार को गांवों के भ्रमण के दौरान टपक विधि से खेती की जानकारी मिली। इससे प्रभावित होकर उन्होंने नौकरी छोड़ खेती का फैसला किया। प्रभात आज टपक विधि से खेती कर रहे हैं। उनके द्वारा माइक्रो एक्स फाउंडेशन नाम से एक संस्था भी रन की जा रही है। इस विधि की मदद से वह छत पर ही सब्जी और फल की खेती भी कर पा रहे हैं।

मोबाइल के मैसेज से सिंचाई

प्रभात ने इस टपक विधि सिंचाई में अपना इंजीनियरिंग दिमाग भी लगा रखा है। प्रभात के मुताबिक एक विशेष ऐप और मोबाइल एसएमएस की सेटिंग सिंचाई को शुरू करती है। जब कभी वह बाहर जाते हैं तो मैसज भेजने भर से सिंचाई शुरू हो जाती है। ऐसी सेटिंग की गई है कि 10 मिनट बाद सिंचाई अपने आप रुक जाती है। ये सिंचाई प्रक्रिया टाइमर के जरिये जुड़ी हुई है। टपक विधि में पाइप लगाकर सिंचाई की जाती है। ये सिंचाई बूंद-बूंद होती है तो पानी बर्बाद भी नहीं होता है। प्रभात ने इस विधि पर अपने छत पर ही 64 तरह के पौधे लगाक रखे हैं। खैती में जैविक खाद का ही हमेशा इस्तेमाल करते हैं।

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