मल्टिनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ गांव लौटे सीवान के ये 2 लाल, खेती से करने लगे 10 लाख की कमाई

जिंदगी में एक बेहतर मुकाम पाने के लिए जोखिम तो उठाना ही पड़ता है। बिहार के सिवान जिले के रहने वाले धीरेंद्र और आदित्य ने ऐसा ही जोखिम उठाया और इसकी वजह से आज लाखों में इनकी कमाई हो रही है। धीरेंद्र ने मैनेजमेंट और लॉ की पढ़ाई की है। वे एक अच्छी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी भी कर रहे थे। वहीं, आदित्य ने माइक्रोबायोलॉजी की पढ़ाई की है। वे एक एनआरआई हैं। लंबे अरसे से दोनों एक-दूसरे को जान रहे थे, मगर बिजनेस पार्टनर ये दोनों लगभग दो साल पहले बने हैं।

आया ये आइडिया

धीरेंद्र की चाहत थी कि नौकरी को छोड़ कर कोई बिजनेस किया जाए। उनके दिमाग में खेती करने का आईडिया आया। आदित्य से उन्होंने इस बारे में बात की और वे भी इसके लिए तैयार हो गए। बिहार सरकार के एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी से इन दोनों ने खुद को पंजीकृत करवा लिया।

पहले ही साल इतना मुनाफा

धीरेंद्र और आदित्य ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया। शुरुआत में लोगों को लगा कि ये क्या कर रहे हैं। उन्होंने इन्हें कोई भाव नहीं दिया, मगर कभी भी उन्होंने इसके बारे में नहीं सोचा। सिवान के एक कृषि विशेषज्ञ और मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण समिति के अध्यक्ष बीएस वर्मा ने उनका साथ दिया। वे रिटायर्ड इंजीनियर थे। इन्हीं के पॉलीहाउस में धीरेंद्र और आदित्य ने खेती करना शुरू कर दिया। टमाटर और शिमला मिर्च की पहले साल उन्होंने खेती की, जिसमें कि उन्हें लाखों रुपए का मुनाफा हुआ।

ये भी है उद्देश्य

धीरेंद्र और आदित्य कहते हैं कि केवल अच्छी कमाई करना ही हमारा उद्देश्य नहीं है, बल्कि खेती के लिए हम लोगों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। इसकी वजह से आज कई लोगों को रोजगार उपलब्ध हो पाया है। एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी से नाता रखने वाले केके चौधरी और हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के पीके मिश्रा एवं आरपी प्रसाद भी धीरेंद्र और आदित्य को पूरा सहयोग प्रदान कर रहे हैं। धीरेंद्र और आदित्य मिलकर मशरूम की खेती इतनी अच्छी तरीके से कर रहे हैं कि इसकी वजह से उनकी कमाई आज लाखों रुपए में पहुंच गई है। इस सीजन में भी उन्हें उम्मीद है कि इससे 10 लाख रुपये की उनकी कमाई हो जाएगी। पॉलीहाउस में उन्होंने 3 रैक बना रखे हैं, जहां वे मशरूम उगा रहे हैं।

किसानों का भरोसा लौटाना है

धीरेंद्र और आदित्य यहीं नहीं रुके हैं। इनकी आगे की लंबी प्लानिंग है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की अब वे सोच रहे हैं। मशरूम से तैयार होने वाले फूड प्रोडक्ट ये लोग बनाना चाहते हैं। किसानों से भी वे जुड़े रहे हैं और अधिकाधिक संख्या में उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की इनकी कोशिश है। धीरेंद्र और आदित्य का कहना है कि खेती के ऊपर से जो किसानों का भरोसा खत्म होता जा रहा है, एक बार फिर से उसे वापस लाने की कोशिशों में वे जुटे हुए हैं।

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