महाशिवरात्रि पर बाबा वैद्यनाथ की विशेष आराधना, शिव बारात में जन सैलाब, लाखों लोगों ने किया जलाभिषेक

महाशिवरात्रि यूं तो सभी शिवालयों के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन देवघर में इसका और भी अधिक महत्व है। जानकार बताते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन ही देवनगरी में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ कामनालिंग बाबा वैद्यनाथ की स्थापना हुई है।

ऐसे में देवनगरी में इस पावन पर्व को और भी अधिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। प्राचीनकाल से ही देवघर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मेला लगता आ रहा है। 1994 से एक बड़ा बदलाव भी आया है। शिवरात्रि महोत्सव समिति के तत्वावधान में उक्त्त वर्ष से ही यहां पर भव्य एवं विराट शिव बारात भी निकाली जाती है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर परंपरानुसार द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ कामनालिंग बाबा वैद्यनाथ की चतुष्प्रहर पूजा की गई। रात्रि काल में ही सभी प्रहरों की विशेष पूजा-अर्चना सरदार पंडा की ओर से की गई। विशेष पूजन का यहां पर अधिक महत्व है। चतुष्प्रहर पूजा को लेकर बाबा वैद्यनाथ मंदिर में विशेष व्यवस्था करायी गई थी। महाशिवरात्रि पर बाबा वैद्यनाथ मंदिर में परंपरानुसार शृंगार पूजन का आयोजन संध्याकाल में नहीं हुआ। ऐसे में देवघर मंडल कारा से हर दिन बाबा वैद्यनाथ के शृंगार पूजन को लेकर बनकर जाने वाला पुष्प मुकुट नहीं भेजा गया।

बताते चलें कि महाशिवरात्रि के दिन नहीं बनने वाले पुष्प मुकुट के एवज में देवघर मंडल कारा में श्रावण पूर्णिमा के दिन दो पुष्प मुकुट तैयार किए जाते हैं। उसमें एक बाबा वैद्यनाथ के लिए जबकि दूसरा बाबा बासुकीनाथ के लिए विशेष वाहन से स्कॉर्ट कर भेजा जाता है। मंदिर प्रांगण में महाशिवरात्रि पर जागरण कार्यक्रम भी हुआ। देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे हजारों भक्त्तों ने जागरण किया। महाशिवरात्रि पर बाबा मंदिर प्रांगण में मौर-मुकुट की भी जमकर बिक्री हुई। बाबा पर मौर-मुकुट अर्पित किया जाता है। देवनगरी की प्राचीन परंपरा के अनुसार बाबा वैद्यनाथ को रोहिणी घटवाल परिवार की ओर से आए मौर-मुकुट को सर्वप्रथम अर्पित किया गया।

 

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