गलत रे’प केस करने पर महिला को भी जाना होगा जेल, फर्जी केस का मुकदमा चलेगा

दुष्कर्म का झूठा मामला दर्ज कराने वाली महिला पर भी केस चलेगा :एक महिला अपने ही झूठ के जाल में फंस गई। उसने चार लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि उसने ना केवल झूठा केस दर्ज कराया है, बल्कि खुद पहले से शादीशुदा होने के बावजूद आरोपी से शादी कर अपराध किया है। अदालत ने महिला के खिलाफ झूठी गवाही व झूठे साक्ष्य पेश करने के तहत मुकदमा चलाने के आदेश दिए हैं।

रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमोहन सिंह की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है जब महिलाएं दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध में लोगों को फंसाने के लिए कानून का दुरुपयोग करती हैं। ऐसे मामलों में झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाली महिलाओं के साथ सख्ती से निपटा जाना जरूरी है। समाज में फैलते इस तरह के दीमक को समाप्त करने के लिए बलात्कार का झूठा आरोप लगाने वाली महिलाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस मामले में सामूहिक बलात्कार की झूठी कहानी गढ़ने वाली महिला के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 344 के तहत आपराधिक मुकदमा चलाने के आदेश दिए जा रहे हैं, ताकि अन्य भी इससे सबक ले सकें।

शादी के प्रमाणपत्र व फोटोग्राफ से खुला मामला बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप राणा ने अदालत के समक्ष शिकायतकर्ता महिला व मुख्य आरोपी की शादी के फोटोग्राफ व विवाह प्रमाणपत्र अदालत के समक्ष पेश किया। इन फोटोग्राफ में महिला के परिवार के सदस्य भी शादी समारोह में शामिल पाए गए। इन दोनों ने दिल्ली के यमुना बाजार स्थित आर्य समाज मंदिर में यह शादी 4 दिंसबर 2012 को की थी, जबकि अपनी शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने 29 नवंबर 2012 उसका अपहरण किया था।

उसे 10 दिसंबर 2012 तक हरियाणा के करनाल में बंधक बनाकर रखा गया, जहां मुख्य आरोपी के साथ तीन अन्य आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया, जबकि वह खुद आरोपी के साथ शादी कर उस दौरान हरियाणा के करनाल अपने ससुराल रहने के लिए गई थी। शादी कराने वाले आर्य समाज मंदिर के पंडित की गवाही भी महत्वपूर्ण रही।

ब्लैकमेलिंग, अवैध वसूली और अपहरण करने का आरोप लगाया

महिला ने इस मामले में मुख्य आरोपी के साथ उसके परिवार के ही तीन अन्य सदस्यों पर वर्ष 2012 में सामूहिक बलात्कार, ब्लैकमेलिंग, अवैध वसूली व अपनी भतीजी के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप राणा ने खुलासा किया कि महिला ने सिर्फ अपने फायदे के लिए उनके मुवक्किलों के खिलाफ झूठी गवाही दी, बल्कि खुद झूठ बोलकर इस मामले के मुख्य आरोपी से शादी की। महिला ने उनके मुवक्किल ने यह नहीं बताया कि वह पहले से शादीशुदा है और उसके एक बच्चा भी है। जब महिला के दूसरे पति को इसकी जानकारी मिली, तो महिला ने उसे व उसके परिवार के तीन अन्य सदस्यों को सामूहिक बलात्कार व अन्य गंभीर अपराधों के तहत आरोपी बना दिया।

 

फोन कॉल रिकार्डिंग से खुलासा हुआ

इस मामले में महिला व मुख्य आरोपी के रिश्तेदार के बीच अप्रैल 2013 में फोन पर हुई बातचीत की रिकार्डिंग से पूरे मामले का खुलासा हुआ। रिकार्डिंग में महिला एक आरोपी से बात कर रही थी। वह उसे मामाजी कहकर बात कर रही थी। यह बातचीत मुख्य आरोपी से समझौता कराने को लेकर की गई थी। अदालत ने शिकायतकर्ता महिला व आरोपी की आवाज के नमूने को सीएफएसएल जांच के लिए भेजा। सीएफएसएल रिपोर्ट में शिकायतकर्ता महिला व आरोपी की आवाज का मिलान हो गया।

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