गोबर से गमले बनाकर घर बैठे खूब कमा रहे हैं बेगूसराय के गोविंद, जानिए यह देसी बिजनेस

गोबर को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र माना गया है। जब भी कोई पूजा-पाठ होता है, तो गोबर का इस्तेमाल किया ही जाता है। गोबर के उपले भी बनाए जाते हैं। उर्वरक भी गाय के गोबर से बनते हैं। फसलों की पैदावार बढ़ाने में इससे मदद मिलती है। गोबर से जैविक गमले भी तैयार किए जा सकते हैं। बिहार के एक युवक ने ऐसा ही किया है। नाम है इनका राकेश कुमार, जो कि बेगूसराय के गोविंदपुर गांव के रहने वाले हैं।

बन चुकी है एक अलग पहचान

गाय के गोबर से जैविक गमले बनाने की वजह से आज इनकी एक अलग ही पहचान बन गई है। यह बात जरूर रहे कि वे निर्माण क्षेत्र में इससे पहले काम कर रहे थे और कई वर्षों तक उन्होंने यह नौकरी की थी, लेकिन साल 2007 में इन्होंने गांव लौटकर पशुपालन और खेती करने का कदम उठा लिया। इसमें जब उन्हें कामयाबी मिली, तो इसके बाद उन्होंने कुछ और भी करने का सोचा। ऐसे में उन्होंने जैविक गमले बनाने शुरू कर दिए।

गोबर से कई तरह की वैरायटी

इस बारे में राकेश यह कहते हैं कि गाय की हर चीज की हमारे शास्त्रों में एक अलग ही महत्ता बताई गई है। गाय के गोबर से भी कई तरह की वैरायटी तैयारी करने की हमारी कोशिश है। गुजरात से राकेश इसके लिए एक मशीन भी लेकर आए हैं। इसमें कई तरह की सामग्रियों को मिलाकर वे गोबर से गमले बना लेते हैं। गमले बनाने के लिए जहां 1% लकड़ी का बुरादा की आवश्यकता होती है, वहीं इसमें 10% नीम की खली, 2% चूना और 73% गोबर मिलाया जाता है।

इतने गमले होते हैं तैयार

करीब एक क्विंटल सामग्री यदि हो जाए तो इससे 65 जैविक गमले आराम से बना लिए जाते हैं। गोबर से बने ये जैविक गमले बहुत ही मजबूत होते हैं। इनकी खासियत है कि यह टूटते नहीं हैं। सिर्फ 15 रुपये में वे गमलों को बेच रहे हैंम इसमें किसी तरह की कोई भी कलाकारी नहीं होती है।

ऑर्गेनिक सब्जियां उगाएं

राकेश यही कहते हैं कि गमले का इस्तेमाल हर किसी को हमारे देश में करना चाहिए, ताकि ऑर्गेनिक गमले के जरिए ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई जा सकें। इससे लोगों की सेहत बनी रहेगी। राकेश आगे चलकर गाय के गोबर से दीए, मूर्तियां और अगरबत्ती तक बनाना चाहते हैं।

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