माले के दीपांकर बोले- मोदी सरकार आक्रामक साम्राज्यवादी शक्ति की तरह व्यवहार कर रही है, संघीय व्यवस्था को कुचला

Patna : बंगाल और केंद्र के बीच जो तकरार हो रहा है, वो क्या है? क्या हर जगह दोष ममत बनर्जी का है? क्या उन्हें हर जगह जानबूझ कर पोक किया जा रहा है। दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाने वाली ममता बनर्जी की ऐसी हालत केंद्र ने क्योंक कर रखी है? क्या केंद्र सरकार किसी भी हालत में बंगाल में सरकार गिरा या हटा सकती है? फिर भारत जैसी शासन की संघीय व्यवस्था में बंगाल जैसे बड़े राज्य को फंसाकर रखने का क्या मतलब है? सवाल कई हैं लेकिन जवाब नहीं मिल रहा। अलबत्ता यह बात तो साबित होती जा रही है कि ममता बनर्जी के लिये जो व्यूह रचना की जा रही है उसमें भाजपा भी बुरे तरह से फंस सकती है। इसके संकेत भी नजर आने लगे हैं। कल तक टीएमसी की धुर विरोध काम्युनिस्ट भी इस पूरे प्रकरण में मोदी और केंद्र को ही दोषी ठहरा रहे हैं। सीपीआई माले ने तो मोदी को तनाशाह बताते हुये कहा है कि ऐसा लग रहा है कि देश में साम्राज्यवादियों की सरकार चल रही है। इधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि केंद्र सरकार ने मुझे अपमानित किया। मुझे बदनाम करने के लिये, मेरी इमेज खराब करने के लिये ट‍्वीट करवाये गये।

सीपीआई माले के महासचिव दीपांकर भट‍्टाचार्य ने एक ट‍्वीट कर कहा है – मोदी सरकार एक आक्रामक साम्राज्यवादी शक्ति की तरह व्यवहार कर रही है। चक्रवात से तबाह राज्य के मुख्य सचिव को दिल्ली वापस बुलाना भारत के संघीय शासन के इतिहास में एक चौंकाने वाला ही फैसला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाने का द्योतक है। बंगाल को जीतने के लिए MoSha (MODI-SHAH) अभियान को हराने वाले लोगों को दंडित करने के लिये इस तरह के फैसले लिये जा रहे हैं।
बता दें कि चक्रवर्ती तूफान यास से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शामिल नहीं होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दरअसल पहले ममता का मोदी के साथ बैठक में हिस्सा लेना तय था। इस तरह की बैठक में विपक्ष के नेता को बुलाने की परंपरा नहीं है। लेकिन केंद्र ने ममता को नीचा दिखाने के लिए ही उनके कट्टर दुश्मन बन चुके विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को बैठक में बुलाया। ममता ने उसी समय प्रधानमंत्री दफ्तर को सूचित कर दिया था कि वे बैठक में नहीं रह सकेंगी।
ममाले ने ऐसा तूल पकड़ा कि केंद्र सरकार ने रात में राज्य के मुख्य सचिव आलापन बनर्जी को प्रतिनियुक्ति पर 31 मई को दिल्ली पहुंचने का फरमान जारी कर दिया। अभी इसी सप्ताह उनको तीन महीने का सेवा विस्तार दिया गया था। ममता इस फैसले से काफी नाराज हैं। मुख्य सचिव राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रमुख तो थे ही, राज्य में कोविड प्रबंधन का काम भी संभाल रहे थे। इसी वजह से मुख्यमंत्री ने उनको सेवा विस्तार देने की सिफारिश की थी। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है। घोष कहते हैं कि भाजपा बंगाल विधानसभा चुनाव में अपनी हार नहीं पचा पा रही है।

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