नीतीश कुमार के कार्यक्रम में मांझी की एंट्री, ‘शुक्रिया’ वाली पॉलिटिक्स हुई शुरु

  • पटना
    चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि बिहार में विधानसभा चुनाव टाइम पर कराए जाएंगे। इस चुनावी सरगर्मी को देखते हुए राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में सीएम नीतीश कुमार का भी एक्टिव होना स्वभाविक है। कोरोना काल में नीतीश कुमार पर सक्रिय नहीं होने के आरोप लगे, तो अब वो फ्रंट फुट पर बैटिंग के मोड में दिख रहे हैं। नीतीश कुमार की राजनीतिक पारी इतनी लंबी है कि बिटविन द लाइंस में भी ऐसा कुछ बोल जाते हैं जिसके गहरे राजनीतिक अर्थ होते हैं। अब पिछले दिनों एक सरकारी कार्यक्रम में ऐसा ही हुआ। असल में ये कार्यक्रम उर्जा विभाग का था। इसमें कई परियोजनाओं का उद्घाटन हो रहा था। कार्यक्रम के अंत में जब धन्यवाद ज्ञापन होने लगा तो अफसर ने पूर्व सीएम जीतन राम मांझी का नाम भी लिया।

अब चौंकने की बारी नीतीश कुमार की थी। सीएम नीतीश ने कहा कि मांझी जी आप यहां आए हैं ये तो हमें किसी ने बताया ही नहीं। आप आए इसके लिए आपका धन्यवाद। अब आप कह सकते हैं कि ये औपचारिक बातें हैं। सीएम का इतना कहना बनता है। तो जान लीजिए कि राजनीति में न तो कुछ औपचारिक होता है और न ही अनौपचारिक। नीतीश कुमार जैसे मंझे नेता यूं ही कुछ नहीं बोलते। हर बात नाप तौल के बोलने के आदी नीतीश कुमार की दरअसल ये शुक्रिया वाली पॉलिटिक्स थी। सीएम नीतीश के धन्यवाद कहने का फौरी असर जीतन राम मांझी पर दिखने भी लगा है। लगे हाथ मांझी ने नीतीश कुमार के काम को अच्छा बताना शुरू कर दिया है।

मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) महागठबंधन से अलग हो चुकी है। मांझी ने ऐलान कर दिया है कि महागठबंधन में उनकी वापसी की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने अभी आपने आगे की रणनीति को उजागर नहीं किया है लेकिन ये जरूर कहा है कि 30 अगस्त तक इसकी घोषणा कर दी जाएगी। आप नीतीश की शुक्रिया पॉलिटिक्स का असर देखिए। मांझी ने न केवल उनकी तारीफ की है बल्कि पूर्व सीएम लालू यादव को निशाने पर भी लिया है।

मांझी ने कहा है कि लालू की वजह से ही उन्हें अपनी सीएम की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। उन्होंने तेजस्वी को भी मांझी ने अपनी अनुसूचित जाति जनजाति को इकट्ठा करने की मुहिम को खराब करने वाला बताया है। वैसे तो मांझी खेमे का दावा है कि उनकी बात ओवैसी, पप्पू यादव और यहां तक कि कांग्रेस के कुछ नेताओं से भी हो रही है। लेकिन राजनीतिक लक्षण उनके झुकाव नीतीश की ओर ज्यादा होने की तरफ इशारा कर रहे हैं। अब ये वक्त बताएगा कि नीतीश की शुक्रिया पॉलिटिक्स से मांझी अभिभूत हैं या उन्होंने अपने तरकश में कुछ नया छिपा रखा है।

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