मिथिलांचल की तरक्की को लगे पंख, एयरपोर्ट के बाद अब मिला एम्स

पटना
बिहार में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वोटरों को लुभाने के लिए केंद्र सरकार एक के बाद एक सौगात प्रदेश वासियों को दे रही है। इसी क्रम में मोदी सरकार ने बिहार को एक और सौगात दी है। मंगलवार को पीएम मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक ने दरभंगा में एम्स खोलने की मंजूरी दे दी है। मिथिलांचल में एम्स की ये मांग काफी दिनों से लंबित थी। अब जब चुनाव नजदीक आ गए हैं तो NDA सरकार मिथिलांचल के मतदाताओं को साधने के लिए एक-एक करके सारी मांगों को पूरा करने का स्टेप उठाती नज़र आ रही है।

1264 करोड़ का बजट, 750 बेड की होगी व्यवस्था
जानकारी के अनुसार दरभंगा में प्रायोजित एम्स की कुल लागत 1264 करोड़ रुपये होगी। इसमे अत्याधुनिक तकनीकों से लोगों का इलाज़ किया जाएगा। दरभंगा एम्स में कुल 750 बेडों की व्यवस्था होगी। इस एम्स के बनकर तैयार होने से उत्तर बिहार की जनता को उच्च श्रेणी की स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

प्रदेश का दूसरा एम्स
प्रदेश में स्वास्थ्य संबन्धित सुविधाओं की कमी हमेशा से रही है। जिसके बाद अब दरभंगा में एम्स स्वीकृत होने से जनता को उच्च स्तर की चिकित्सकीय सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। आपको बता दें कि अभी तक पूरे प्रदेश में केवल एक मात्र एम्स पटना में है, जहां पूरे राज्य से मरीज अपने उपचार के लिए आते हैं। दरभंगा एम्स बिहार का दूसरा एम्स होगा। इससे उत्तरी बिहार के लोगों को खासा लाभ मिलेगा।

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दरभंगा एयरपोर्ट लगभग बनकर तैयार
92 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार दरभंगा एयरपोर्ट को लेकर भी कुछ दिन पूर्व प्रदेश वासियों को एक गुड न्यूज़ मिली थी। एयरपोर्ट से छठ पूजा से पहले दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के लिए हवाई सेवाएं चालू हो जाएंगी। केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह ने इसकी जानकारी दी थी।

उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि दरभंगा से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के लिए डेली फ्लाइट्स की बुकिंग इसी महीने यानी सितंबर के अंत तक शुरू हो जाएगी। फ्लाइट ऑपरेशन छठ पूजा से पहले नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो जाएगा। आपको बता दें कि दरभंगा एयरपोर्ट बिहार का तीसरा एयरपोर्ट होगा।

दरभंगा को IIM मिलने की भी चर्चाएं
सूत्रों के अनुसार दरभंगा में इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) के प्रोजेक्ट को बनाने की मंजूरी मिल सकती है। हालांकि अभी तक इस पर केन्द्रीय कैबिनेट द्वारा कोई फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन ऐसी संभवानाएं जताई जा रही हैं कि इस पर जल्दी ही मुहर लग सकती है।

दरअसल इतनी बड़ी आबादी वाला प्रदेश होने के बावजूद भी बिहार में आईआईएम का एक भी संस्थान नहीं होने के कारण इसकी मांग काफी लंबे समय से हो रही है। जिसके कारण अब यह कयास लगाया जा रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार इस पर मुहर लगा सकती है।

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