मां बनाती थी घर-घर रोटियां, पिता ने बेचे अंडे : देश के सबसे युवा IPS के संघर्ष की अदभुत दास्तान

Patna : देश के सबसे युवा आईपीएस सफीन हसन ने जब हाल मे एक कविता लोगों के बीच में रखी तो उनकी एक और प्रतिभा से लोगों को रूबरू होने का मौका मिला। उन्होंने अपनी कविता ट‍्वीट की :-

छोटा सा प्रयास-
अपना एक तारा, अपना एक फलक चाहिए
ये दुनिया आम है, मुझे कुछ अलग चाहिए ।
मेरे क़िस्से कहानी पढ़ने वाले कह रहे थे कल
तुम्हारे ज़ख़्म ग़हेरे है तुम्हें कोई मलम चाहिए ।
तुम्हें कान्हा की मुरली और मूर्ति दोनो मिल जाए
सबर हो राधिका जैसा, मीरा सी तलब चाहिए ।
– सफीन

सपने वो नहीं होते जो सोते समय देखे जाते हैं, बल्कि सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते। वर्ष 2018 में 22 साल की उम्र में देश के सबसे युवा भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी बनकर सफीन हसन ने इस प्रेरणात्मक वाक्य को सच कर दिखाया। एक निम्नवर्गीय परिवार जिसमें पिता साधारण इलेक्ट्रीशियन और मां घर खर्च चलाने के लिए मेड का काम किया करती थीं। कई बार खाने तक को घर में कुछ नहीं रहता था। इतना ही नहीं उनकी पढ़ाई के लिए न कोई फाइनेंशियल सिक्योरिटी थी और कई बार तो फीस भरने के भी लाले पड़ जाते थे। लेकिन कहते हैं न सोना जितना तपता है उतना ही सुनहरा होता जाता है। सफीन के साथ भी ऐसा ही है। वे आज के दौर के युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। जो यूपीएससी की तैयारी करते हैं, वे उन्हें हीरो मानते हैं। उन्होंने तमाम नगेटिव आस्पेक्ट को हराकर अपना मुकाम पाया।
उन्होंने बेहद छोटी उम्र में ही बड़ी कामयाबी हासिल कर ली। 22 साल की उम्र में जब ज्यादातर युवा अपने बारे में ठीक से भी नहीं सोच पाते, लक्ष्य निर्धारित नहीं कर पाते। अपने जीवन को लेकर उधेड़बुन में रहते हैं। सफीन ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो सिर्फ सपने में ही सच हो सकता था। सफीन ने 22 वर्ष की उम्र में अपनी पहली ही कोशिश में यूपीएससी क्लियर कर लिया और आइपीएस बन गए। सफीन बताते हैं- सच तो यह है कि मैंने प्राइमरी स्कूल में ही तय कर लिया था कि सिविल सर्विस करूंगा। ऐसा इसलिए कि जब वो 5वीं कक्षा में पढ़ते थे तो उनके विद्यालय का निरीक्षण करने के लिए एक दिन उस जिले के कलेक्टर आए। जिनके आने पर उनके रुतबे और शान को देखकर सफीन ने अपने मास्टर जी से पूछा कि यह कौन हैं? उनके टीचर ने सफीन को समझाने के लिए उत्तर दिया कि बस समझ लो कि ये जिले के राजा हैं। सफीन के बाल मन में यह बात बस गयी। उन्होंने सिविल सर्विस में जाने का मन ही मन में प्रण कर लिया।

 

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सफीन मूल रूप से गुजरात के सूरत के एक छोटे से गांव कानोदर के रहने वाले है। सफीन हसन की इसी गांव के सरकारी स्कूल में शुरुआती शिक्षा हुई। बाद की पढ़ाई भी सरकारी स्कूल से ही पूरी करनी पड़ी। पढ़ाई में हमेशा से श्रेष्ठ सफीन की शुरुआती शिक्षा तो जैसे-तैसे पूरी हो गयी। लेकिन जब प्लस टू में उन्होंने साइंस लेनी चाही तो गांव के सरकारी स्कूलों में यह सुविधा नहीं थी। उनके घर की आमदनी इतनी नहीं थी कि किसी पब्लिक स्कूल में प्रवेश लिया जा सके किस्मत अच्छी थी कि उसी समय वहां एक नया पब्लिक स्कूल खुला। स्कूल में सफीन के पुराने शिक्षक भी थे। वे जानते थे कि सफीन पढ़ाई करके स्कूल को पहचान दिला सकते हैं। उन्होंने सफीन को वहां पढ़ने का मौका दिया और फीस भी माफ करा दिया।
साफीन के माता-पिता एक हीरे की यूनिट में काम करते थे। लेकिन दुर्भाग्यवश साफीन के माता-पिता की नौकरी चली गई। जिसेक बाद घर का खर्च उठाने के लिए उनकी मां लोगों के घरों में रोटी बेलने का काम करने लगीं तो वहीं, पिता ने इलेक्ट्रिशियन के काम के साथ-साथ जाड़ों में अंडे और चाय का ठेला लगाने का काम भी करने लगे। हसन ने अपने अभिभावकों के इस कष्ट को महसूस किया और उनका निश्चय दिनोंदिन दृढ़ होता चला गया। लेकिन भगवान को उसकी अभी और परीक्षा लेनी थी। जिस दिन यूपीएससी की परीक्षा होनी थी उससे ठीक एक दो दिन पहले ही सफीन हसन का रोड एक्सीडेंट हो गया। उनके घुटने, केहुनी और हाथ-पैर में काफी चोटें आई। लेकिन उनके दृढ़ निश्चय के आगे सब बौना था।

 

वे अपने जख्मों की परवाह किये बगैर परीक्षा सेंटर पहुंच गये। उसी चोट और दर्द के साथ परीक्षा दी। एक ऐसी परीक्षा दी जो इतिहास बनानेवाली थी। और फिर परिणाम के साथ इतिहास भी बना। सफीन देश के सबसे युवा आईपीएस बनकर लोगों के सामने अवतरित हुए।

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