MBA-LLM कर पटना वाले घर में ही उगाने लगे मशरूम, खूब हो रही कमाई

पटना

ये अपने घर में मशरूम की खेती कर रहे हैं। जी हां, घर के ही एक कोने में ये मशरूम उगा रहे हैं। टिश्यू कल्चर लैबोरेट्री भी इन्होंने बीज के उत्पादन के लिए बना रखी है। नागालैंड के साथ नेपाल और भूटान में भी इनके बीज का इस्तेमाल किसान कर रहे हैं।

कौन हैं ये?

नाम है इनका शशि कुमार ठाकुर। पटना के बेली रोड स्थित एसबीआई ऑफिसर्स कॉलोनी में रहते हैं। अपने घर में ही ये रोजाना 7 से 10 किलो मशरूम का उत्पादन आसानी से कर रहे हैं। मशरूम उत्पादन के बारे में इन्हें सीएसआईआर के वैज्ञानिक डॉ एमएस आलम से पता चला था। ट्रेन में इनसे शशि की मुलाकात हुई थी।

शुरुआत कुछ ऐसे हुई थी

उस वक्त शशि 15 साल के थे। भुवनेश्वर से वॉलीबॉल मैच खेल कर लौट रहे थे। 500 ग्राम मशरूम का बीज भी इन्हीं वैज्ञानिक से उन्हें मिल गया था। सबसे पहले तो शशि ने मशरूम उत्पादन की शुरुआत पांच बैग से की थी। आज इनका टर्नओवर 15 लाख रुपये सालाना पहुंच गया है। ठाकुर इस वक्त 55 साल के हैं। मशरूम की खेती ये 35 वर्षों से कर रहे हैं।

इन डिग्रियों के मालिक

11 जिलों में उन्होंने मशरूम केंद्र भी बना रखे हैं। बेबी फूड और आचार आदि भी इनके केंद्रों पर तैयार हो रहे हैं। ये मशरूम के ही फूड प्रोडक्ट हैं। शशि कुमार ठाकुर ने एमबीए कर रखा है और उनके पास एलएलएम की डिग्री भी है। मशरूम की खेती के बारे में ये लोगों को भी बताते हैं। लगभग 18 हजार लोगों को ये प्रशिक्षित कर चुके हैं।

ये आ चुके हैं केंद्र में

केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह से लेकर बाबा रामदेव और विधायक अरुण कुमार सिन्हा तक इनके केंद्र में पहुंच चुके हैं।मशरूम रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। इसके अलावा गठिया और कैंसर जैसी बीमारियों में भी यह मददगार होता है।

जागरूकता की दरकार

शशि कुमार का कहना है कि मशरूम का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है बशर्ते कि इसके बारे में जागरूकता फैलाई जाए। मशरूम की खेती पहली बार इन्होंने ढाई हजार रुपए से शुरू की थी, जबकि आज उनकी इससे अच्छी-खासी कमाई हो जा रही है।

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