IGIMS में 6 करोड़ से बनेगी नई डायलिसिस यूनिट, अगले साल अगस्त से मिलने लगेगी सुविधा

Patna : पटना के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेज (आईजीआईएमएस) में डायलिसिस यूनिट में आम लोगों को अगले साल से इलाज मिलने लगेगा। आईजीआईएमएस में छह करोड़ की लागत से इस यूनिट का निर्माण प्रस्तावित है। नये डायलिसिस यूनिट का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जायेगा। शुक्रवार को इसका भूमिपूजन हो गया। अधिकारियों ने बताया कि अगले साल अगस्त तक इसकी सुविधा मरीजों को मिलने लगेगी। यहां 35 डायलिसिस मशीन होंगी, जिससे प्रतिदिन 100 मरीजों का डायलिसिस संभव हो सकेगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सेवा योजना के अंतर्गत इसका निर्माण आईजीआईएमएस में हो रहा है। इस यूनिट में 22 और डायलिसिस स्टेशन होंगे। अभी 12 मशीन की सुविधा है। भूमिपूजन में संस्थान के निदेशक डॉ. एनआर विश्वास के अलावा किडनी विभागाध्यक्ष डॉ. ओमकुमार कुमार, डॉ. अमरेश कृष्णा, डॉ. प्रीत पाल, टेक्नीशियन अजय सहनी और डायलिसिस नर्सिंग इनचार्ज वलसा भी मौजूद थे। डॉ. ओम कुमार ने बताया कि यूनिट बनने के बाद संस्थान में ओपीडी बेसिस पर भी डायलिसिस की सुविधा मरीजों को दी जा सकेगी। यानी मरीज आएंगे और डायलिसिस कराकर चले जाएंगे। उन्हें भर्ती होने की जरूरत नहीं होगी। डॉ. अमरेश कृष्णा ने कहा कि इस यूनिट बनने के बाद बिहार का यह सबसे बड़ा डायलिसिस यूनिट होगा, जहां प्रतिदिन 100 से अधिक मरीजों का डायलिसिस किया जा सकेगा।
इधर स्वास्थ्य विभाग की फिर एक लापरवाही सामने आयी है। कर्मियों ने जीवित डॉक्टर को मृत घोषित कर दिया था। डॉक्टर वर्तमान में ओमान में कार्यरत हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ जब डॉक्टर ने जीपीएफ व एलआइसी राशि निकासी के लिये विभाग के पास पत्र लिखा। अधिकारी जिसे कल तक मृत समझ रहे थे, उसके द्वारा लिखा हुआ पत्र पाकर उनके कान खड़े हो गये। सिविल सर्जन डॉ अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय टीम गठित की है। बताया गया है कि डॉक्टर अमृता जायसवाल छौड़ादानो प्रखंड के बेला अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत थी। इस दौरान 18 मार्च 2013 को सरकार से वीआरएस लेकर विदेश चली गयीं। फिलवक्त वह ओमान में रह रही हैं। संचिका के अनुसार डॉक्टर अमृता 8 जुलाई 2002 से 7 जुलाई 2003 तक सदर अस्पताल में पीपी प्रोग्रामर थीं। 7 जुलाई से अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेला बाजार छोड़ादानो में पदस्थापित हुईं। इस दौरान 18 मार्च 2013 को वीआरएस लेकर विदेश चली गयीं। अभी वर्तमान में ओमान में हैं।

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