नीतीश के आखिरी चुनाव वाली बात पर तिवारी जी ने सुनाया 1995 वाला किस्सा, आप भी जानिए

पटना

बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण के लिए गुरुवार को प्रचार का आखिरी दिन था और नीतीश कुमार ने एक बड़ा दांव खेल दिया। असल में नीतीश कुमार इस आखिरी दिन के प्रचार के सिलसिले में पूर्णिया में थे। वहां जनता को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने ये कह दिया है कि इस बार का चुनाव उनका आखिरी चुनाव है। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि अंत भला तो सब भला। अब नीतीश के इस बयान के बाद कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पहले तो महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने ही इसपर तंज कसा है। हालांकि तेजस्वी की बातों के बारे में हम बाद में बताएंगे पहले बात शिवानंद तिवारी की टिप्पणी की।

शिवानंद तिवारी ने सुनाया पुराना किस्सा

राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने बकायदा एक फेसबुक पोस्ट लिख नीतीश कुमार के इस दांव पर निशाना साधा है। इस पोस्ट में उन्होंने नीतीश कुमार से जुड़ा एक पुराना किस्सा सुनाया है। आइए पहले आपको इसके बारे में बताते हैं। शिवानंद तिवारी लिखते हैं, ‘भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन से अलग होने के बाद नीतीश जी ने बिहार विधानसभा में घोषणा किया था कि मैं मिट्टी में मिल जाऊंगा लेकिन फिर इनके (भाजपा) साथ नहीं जाऊंगा. आज उन्हीं नीतीश कुमार जी ने बिहार की जनता को संदेश दिया कि यह मेरा अंतिम चुनाव है. इस प्रकार उन्होंने बिहार के मतदाताओं पर भावनात्मक तीर चलाया है. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन यह उनका अंतिम अस्त्र था.’

शिवानंद तिवारी आगे लिखते हैं, ‘बात पुरानी है. जब हम लोग लालू यादव से अलग होकर जनता दल(ज) बनाया था जो बाद में समता पार्टी बना था. 1995 का विधानसभा चुनाव हम लोग लालू यादव के खिलाफ लड़े थे. याद होगा जार्ज साहब के नेतृत्व में चौदह सांसद जनता दल से बाहर आए थे. ऐसा लग रहा था कि बिहार में हमारी सरकार बनेगी. नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का हाव भाव भी प्रदर्शित करने लगे थे. चुनाव नतीजा आया तो नीतीश कुमार को लेकर महज सात लोग बिहार विधानसभा का चुनाव जीत पाए थे. उनमें से एक स्वयं नितीश कुमार भी थे. गांधी मैदान में उसके बाद सभा हुई थी. उस सभा में नीतीश कुमार ने घोषणा किया था की अब मैं बिहार में खूंटा गाड़ कर बैठूंगा और लालू यादव के विरुद्ध संघर्ष करूंगा.’

राजद वरिष्ठ नेता ने आगे लिखा, ‘उसके बाद नीतीश जी दिल्ली गए और वहां से उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और लोकसभा की सदस्यता को बनाए रखा. इस प्रकार जो लोग नीतीश कुमार को लंबे अरसे से जानते हैं और समय-समय पर लिए गए इस तरह के उनके संकल्पों से वाकिफ हैं उनको आज की उनकी घोषणा से कोई आश्चर्य नहीं हुआ. क्योंकि नीतीश जी का अतीत ही बताता है इस तरह के संकल्प का उनकी नजरों में कोई मोल नहीं है.’

तेजस्वी भी कसा तंज

इस पूरे चुनाव के दौरान तेजस्वी लगातार नीतीश कुमार को थका और आउटडेटेड घोषित कर रहे हैं। प्रचार के आखिरी दिन नीतीश के बयान से तेजस्वी को भी तंज कसने का मौका मिल गया। तेजस्वी ने ट्वीट किया कि आदरणीय नीतीश जी बिहारवासियों की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत भी स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। हम शुरू से कहते आ रहे है कि वो पूर्णत: थक चुके है और आज आखिरकार उन्होंने अंतिम चरण से पहले हार मानकर राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर हमारी बात पर मुहर लगा दी।

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