नीतीश कुमार का ऐलान- ये मेरा अंतिम चुनाव, अब इसके दो मायने हैं, दोनों यहां समझिए

पटना

तो क्या भारतीय राजनीति के दिग्गज राजनेताओं में शुमार नीतीश कुमार ने राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया है। आप चौंकिए इससे पहले पूरे मामले को शुरू से समझ लीजिए। असल में बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण के लिए गुरुवार को प्रचार का आखिरी दिन है। नीतीश कुमार इस आखिरी दिन के प्रचार के सिलसिले में पूर्णिया में थे। वहां जनता को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने ये कह दिया है कि इस बार का चुनाव उनका आखिरी चुनाव है। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि अंत भला तो सब भला। यानी वही जो आप समझ रहे हैं, जीत की अपील।

इस बात के मायने क्या हैं?

नीतीश कुमार को अगर ये बताना था कि बिहार विधानसभा चुनाव उनका आखिरी चुनाव है तो उन्होंने इसके लिए तीसरे चरण तक का इंतजार क्यों किया? हां अब हुआ न आपको डाउट। यही वो डाउट है जो नीतीश के इस ऐलान के बाद बिहार की राजनीति में चौतरफा पसरता नजर आ रहा है। अब नीतीश कुमार के इस ऐलान के दो मायने निकाले जा रहे हैं। एक तो सिंपल ये कि जो उन्होंने कहा, यानी कि इस चुनाव के बाद वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

दूसरा मायने जो है वो विशुद्ध राजनीति पैंतरा है। असल में बिहार में पहले और दूसरे चरण के चुनावों के बाद की हवा कुछ अच्छा इशारा नहीं कर रही है। नीतीश क्या, कोई धड़ा आश्वस्त नहीं है। ऐसे में तीसरा और अंतिम चरण ऐसा है जहां हर कोई गेन करना चाहता है। ऐसे में राजनीति के जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार इमोशनल अपील कर अपने काडर को एकजुट कर रहे हैं।

रही बात राजनीति में कही गई बातों की तो उसको कौन पूछने वाला है। लोग कह रहे हैं कि कहने को तो नीतीश कुमार ने यह भी कहा था कि मिट्टी में मिल जाऊंगा पर अब भाजपा के साथ नहीं जाऊंगा पर वो गए। ऐसे में राजनीति में कही गई बातों का तात्कालिक मतलब जरूर देखना चाहिए क्योंकि दीर्घकालिक मतलब में बातें अक्सर बदल भी जाती हैं।

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