गिरवी जमीन को ही कॉन्ट्रैक्ट पर लिया, पपीते ने यूं बदला भागलपुर के किसान का नसीब

पटना

हौसला अगर बुलंद हो तो तरक्की के आकाश को छूने से कोई नहीं रोक सकता। बिहार के भागलपुर के किसान परशुराम दास की कहानी इसी हौसले की कहानी है। एक ऐसा भी वक्त था जब इनका परिवार दाने-दाने को मोहताज था। खुद की जमीन तक गिरवी थी। लेकिन इस बंदे ने हौसला नहीं खोया। सकारात्मक ऊर्जा और नई सोच की वजह से आज न ये अपनी जमीन को छुड़ाने में कामयाब हुए बल्कि अच्छे खासे पैसे भी कमा रहे हैं।

पपीते की खेती ने बदल दिया नसीब

ये कहानी 2011 में शुरू हुई। लगातार चिंतन मनन के बाद परशुराम ने पपीते की खेती का फैसला किया। लेकिन जमीन थी नहीं। ऐसे में अपनी गिरवी जमीन को ही कॉन्ट्रैक्ट पर लिया। कुल जमीन 5 बीघे ही थी। परशुराम ने इस जमीन पर पपीते की खेती कर दी। अच्छे किस्म के बीज से हुई पपीते की खेती ने बंपर रिजल्ट दिया। मुनाफा निकाला गया तो रकम 5 लाख के आसपास तक पहुंच गई।

अब लगातार पपीते पर फोकस

परशुराम बताते हैं कि तब से वह पपीते की खेती में ही जुटे हुए हैं। उनके मुताबिक एक बार पपीता लगा देने पर 3-4 साल तक इससे 75 से 100 टन प्रति हेक्टेअर तक पैदावार हासिल की जा सकती है। पपीते की अच्छी खासी डिमांड है और अभी इतनी खेती नहीं हो पा रही जो लोगों की मांग को पूरी कर सके।

दूसरों को भी सिखा रहे हैं

आज परशुराम की सफलता पूरे इलाके में उन्हें मशहूर बना चुकी है। आसपास के किसान उनसे ट्रेनिंग लेने आते हैं। पपीते की खेती से होने वाले मुनाफे की बदौलत परशुराम का परिवार आज अच्छी जिंदगी बसर कर रहा है। उनके बच्चे अच्छी और स्तरीय शिक्षा हासिल कर पा रहे हैं।

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