पारस ने चिराग को हटाया, सूरजभान बने कार्यकारी अध्यक्ष, चिराग ने पांचों सांसदों को निकाला, सदस्यता समाप्त

New Delhi : दो दिनों की आंतरिक उठापटक के बाद लोक जनशक्ति पार्टी में घिन्नप्पन शुरू हो गया है। लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय दल के नये नेता और पार्टी के चच्चा पशुपति पारस ने अपने भतीजे और अध्यक्ष चिराग पार्टी को अध्यक्ष पद से हटा दिया। उनके इस निर्णय के थोड़ी देर बाद ही चिराग ने अपनी पार्टी से सभी सांसदों को निकालने का फरमान जारी कर दिया। उनके फरमान जारी करते ही बयानों के तीर चलने लगे। पशुपति पारस ने चिराग को हटाने के साथ ही पार्टी की बागडोर पुराने दौर के बाहुबली सूरजभान के हाथ में दे दी। सूरजभान के छोटे भाई चंदन भी सांसद हैं और बागी गुट के सक्रिय सदस्य हैं। सूरजभान को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पशुपति पारस ने पार्टी में बाहुबल के इस्तेमाल की खुली छूट भी दे दी है और इसका पूरा कार्यभार सूरजभान एंड कंपनी के हाथ है। ऐसे में कोई संशय नहीं कि पार्टी के लिये बाहुबल का इस्तेमाल भी शुरू हो जाये।

फिलहाल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये सूरज भान को राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराने की जवाबदेही सौंपी गई है। ऐसे में पूरी संभावना है कि बगावत का नेतृत्व कर रहे पशुपति कुमार पारस को आने वाले दिनों में लोजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया जाये। दूसरी तरफ लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने चिराग पासवान गुट का फैसला सुनाते हुये बताया- पार्टी ने सभी पांच बागी सांसदों की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई और सभी 5 सांसदों को पार्टी से हटाने का निर्णय लिया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाये जाने से कुछ क्षण पहले, चिराग पासवान ने एक इमोशनल नोट के साथ एक पुराना पत्र ट्वीट किया- मैंने अपने पिता और मेरे परिवार द्वारा बनाई गई इस पार्टी को बनाये रखने की कोशिश की लेकिन असफल रहा। पार्टी मां की तरह है और उसे धोखा नहीं देना चाहिये। लोकतंत्र में लोग सर्वोपरि हैं। मैं उन लोगों को धन्यवाद देता हूं जो पार्टी में विश्वास करते हैं। मैं एक पुराना पत्र साझा करता हूं।

पासवान जूनियर ने सोमवार को खुद को कीचड़ में पाया जब लोकसभा में लोकसभा में छह में से पांच सांसदों ने उनके खिलाफ हाथ मिला लिया और पशुपति कुमार पारस को अपना नेता चुन लिया।

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