बिहार: सियासत के खेल में पूर्व सिपाही से मात खा गए पूर्व डीजीपी, कसक तो बहुत होगी

पटना

बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने पिछले दिनों जब स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली तो यही माना जा रहा था कि वे इस बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। हालांकि, गुप्तेश्वर पांडेय को इस बात की तनिक भी उम्मीद नहीं थी कि राजनीति के मैदान में एक सिपाही उन्हें मात दे सकता है। और वह भी तब जब वे अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने चले हों। जी हां, पूर्व डीजीपी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। सियासी उठापटक में उन पर पूर्व सिपाही परशुराम चतुर्वेदी भारी पड़ गए हैं। वर्ष 2004 में परशुराम ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद वे राजनीति में कूद पड़े थे।

राजनीति में की कड़ी मेहनत

परशुराम चतुर्वेदी ने राजनीति में कड़ी मेहनत की है। तब जाकर आज वे इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बक्सर सदर सीट से अपना उम्मीदवार चुनने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी है। जब चुनाव की घोषणा नहीं हुई थी, तभी से यह तय हो चुका था कि एनडीए में बक्सर सदर सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में ही रहेगी। इस बीच गुप्तेश्वर पांडे ने वीआरएस ले लिया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए। इसके साथ ही वो खुद बक्सर का बेटा भी बताने लगे। ये एक तरह से बक्सर सीट को लेकर उनकी दावेदारी समझी गई।

गुप्तेश्वर पांडेय को हमेशा अपने बयान में यह कहते हुए सुना गया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जो प्यार उन्हें मिला है, उसी से अभिभूत होकर राजनीति में वे कदम रख रहे हैं। उन्हें पार्टी जहां से चुनाव लड़ने के लिए कहेगी, वे वहां से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। भले ही गुप्तेश्वर पांडे ऐसा कह रहे थे, लेकिन यह पूरी तरीके से साफ था कि बक्सर से ही वे विधानसभा चुनाव लड़ना चाह रहे थे। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि टिकट फाइनल भी नहीं हुआ था कि बक्सर में उन्होंने अपना कार्यालय भी खोल लिया था।

गुप्तेश्वर पांडे ने जब बक्सर में अपनी तैयारी शुरू कर दी तो भाजपा में इसके बाद अंदर ही अंदर असंतोष पनपने लगा था। धीरे-धीरे यह बगावत के रूप में सामने आने लगा। इसी बीच बीजेपी ने एनडीए में शामिल हुए अपने नए साथी विकासशील इंसान पार्टी यानी कि वीआईपी को ब्रह्मापुर की परंपरागत सीट विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सौंप दी।

अश्विनी कुमार चौबे थे खिलाफ

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे बक्सर से सांसद हैं। वे चाह रहे थे कि बक्सर सदर सीट भारतीय जनता पार्टी के ही किसी समर्पित कार्यकर्ता को दी जाए। वे पहले भी ऐसा कह चुके थे कि किसी समर्पित कार्यकर्ता को ही यहां से प्रत्याशी बनाना है। आखिरकार, परशुराम चतुर्वेदी जो कि भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं और राज्य कार्यकारिणी के सदस्य भी, उन्हें यहां से उम्मीदवार बना दिया गया।

परशुराम चतुर्वेदी के बारे में जानें

परशुराम चतुर्वेदी का महदह गांव पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे के गांव गेरुआ बांध से सिर्फ 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वर्ष 1985 में बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर शामिल होने वाले परशुराम चतुर्वेदी ने वर्ष 2004 में हवलदार पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी और अपनी राजनीतिक पारी उन्होंने शुरू कर दी थी। परशुराम चतुर्वेदी महान संत ब्रह्मलीन त्रिदंडी स्वामी के परिवार से नाता रखते हैं। टिकट पाने की दौड़ में वे पिछले विधानसभा चुनाव में भी थे, मगर तब भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप दुबे को टिकट दे दिया गया था।

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