प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर। Image Source : PTI

बिहार की अस्मत सोनीपत में तार-तार : मां के सामने दो बेटियों का रेप, कीटनाशक पिलाकर जान ले ली

New Delhi : क्या बिहार में ऐसा होता। शायद नहीं। एक मां में कम से कम इतना डर तो नहीं होता। उसमें ताकत होती अपने लोगों के पास चीख कर दर्द बयां करने की। पूरा समाज मदद करता। लेकिन आज वो लुटी पिटी हुई, पथराई आंखों से अपने होने का सबब ढूंढ रही है। क्या ह इंसानियत है? जी नहीं, घटना तो ऐसी है, जिसे सुनकर हैवानों के भी हलक सूख जाये। बिहार की एक मां की ऐसी दास्तान जिसे सुनकर किसी के भी रौंगटे खड़े हो जायेंगे। … और सवाल सिर्फ एक है, क्या बिहारी मां की नियति यही है?
हरियाणा के सोनीपत जिले के एक गाँव में अपने एक कमरे के किराये के घर के बाहर बैठी, वह अपनी दो नाबालिग बेटियों और बिहार में उनके जीवन के बारे में सोचना बंद ही नहीं कर पा रही। …और वह काली रात जिसने यहाँ आने के हफ्तों के भीतर उनकी दुनिया को उलट पुलट दिया। बिहार में उनके पास कोई स्थाई कमाई का साधन या पैसा भले नहीं था, लेकिन वह अपने बच्चों के साथ बहुत खुश थी। 35 वर्षीय महिला ने कहा- लेकिन पता नहीं क्या सूझा, पिछले महीने बेहतर जीवन की तलाश में अपनी दो बेटियों और दो बेटों के साथ सोनीपत चली आई। …जहां एक त्रासदी उनके जीवन को नेस्तनाबूद कर देनेवाली थी।

5 अगस्त को, देर रात 1 बजे के बाद, उसके बगल के एक कमरे में रहने वाले चार लोग उसके घर में घुस गये और उसकी 15 और 11 साल की दो बेटियों के साथ बलात्कार किया। मां की आंखों के सामने उन वहशी दरिंदों ने बेटियों को नोच डाला और फिर बच्चियों को जबरन कीटनाशक पिला दिया। यह सब करते हुये उसने देखा। मां डरी हुई और असहाय। उसके 18 और 14 साल के दो बेटे उस समय छत पर सो रहे थे। बाद में लड़कियों की दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई, जहां उन्हें इलाज के लिये ले जाया गया।
महिला ने गुरुवार को द इंडियन एक्सप्रेस को बताया- उन्होंने जो किया उसे मैं कभी कैसे भूल सकती हूं? उन्होंने पहले मुझे और मेरी बेटियों को जान से मारने की धमकी दी और हमें चिल्लाने से मना किया। मुझे कमरे के एक कोने में बिठाया गया और एक आदमी ने मुझे पकड़ लिया। दूसरों ने मेरी बेटियों के साथ बलात्कार किया। वे मदद के लिय रो रही थीं लेकिन मैं उन्हें बचाने के लिये कुछ नहीं कर सकी। मैंने कभी अपने आपको इस कदर असहाय महसूस नहीं किया।
उसने कहा कि आरोपी अपने साथ कीटनाशक की बोतलें लाये थे। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने महिला को किसी को न बताने की धमकी दी थी। उसके मन में ऐसा डर भर दिया था कि अपनी बेटियों के बीमार होने के बाद भी उसने सभी को बताया कि उनको सांप ने काट लिया है। पुलिस ने बताया- वे लोग डरे हुये थे और उन्होंने मुझसे कहा कि वे मेरे सभी बच्चों को मार डालेंगे। मैं क्या कर सकती थी?
उसके बड़े बेटे ने कहा- काश मेरी माँ ने हमें बताया होता कि क्या हुआ था लेकिन वह डरी हुई थी और पूरी रात रो रही थी। मैंने उससे पूछने की कोशिश की लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। सुबह करीब छह बजे मेरी बहनों ने सिरदर्द की शिकायत की और उल्टी की। मैंने अपनी माँ से फिर पूछा लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
परिवार ने इलाज के लिये दिल्ली के एक अस्पताल तक पहुंचने के लिये 12 किमी का सफर तय किया। अस्पताल पहुंचने पर एक बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया और दूसरी की इलाज के दौरान मौत हो गई। एसएचओ रवि कुमार ने कहा- महिला हमें यह बताने के लिए तैयार नहीं थी कि क्या हुआ? डॉक्टरों द्वारा उसके बयानों को संदिग्ध पाये जाने पर हमारे अधिकारियों ने उससे पूछताछ की। उसने बाद में खुलासा किया कि उसके बगल में किराये के कमरे में रहने वाले चार लोगों ने उसकी बेटी के साथ बलात्कार किया।
ऑटोप्सी में भी यौन हमले और जहर देने की पुष्टि हुई। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने अपने अध्यक्ष विजय सांपला के आदेश पर कड़ा संज्ञान लेते हुये हरियाणा सरकार को एक नोटिस भेजा है, जिसमें अधिकारियों से 19 अगस्त तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा गया है। पुलिस के मुताबिक, चारों आरोपी 22 से 25 साल के प्रवासी कामगारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कीटनाशक की बोतलें भी जब्त कर ली हैं और मामले की जांच कर रहे हैं।
लड़कियों के परिवार ने कहा कि उन्होंने पुरुषों के साथ कभी बातचीत नहीं की। लड़कियां जहां पास के खेतों में काम करती थीं, वहीं उनके भाई और मां निर्माण स्थलों पर काम करते थे। उन्होंने अपने एक कमरे के आवास के लिये प्रति माह 1,100 रुपये का भुगतान किया। परिवार ने कहा कि घटना के बाद, वे संघर्ष कर रहे हैं, कोई नौकरी नहीं है और पड़ोसी उनसे बचना पसंद करते हैं।
एक दशक पहले अपने पति की मौत के बाद अपने परिवार की देखभाल कर रही महिला ने कहा- बिहार में, मेरे माता-पिता और ससुराल वाले सपोर्ट नहीं करते थे, लेकिन हम खुश थे। मेरी बेटियाँ प्यारी और शर्मीली थीं। छोटी बिहार के स्कूल में पढ़ती थी। वह स्मार्ट थी।

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