रवि किशन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दो अलग अलग तस्वीरों में। एक में उनका बेटा सक्षम उनके साथ है तो दूसरी तस्वीर में उनकी बेटियां तनिष्क, इशिता और रीवा। Image Source : starsunfolded.com

रवि किशन की 3 बेटियों के बाद 1 बेटा है : लोगों ने पूछा, आप क्यों ला रहे जनसंख्या नियंत्रण पर प्राइवेट बिल?

New Delhi : उत्तर प्रदेश राज्य में बढ़ती जनसंख्या को स्थिर और नियंत्रित करने के लिये योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण पर एक विधेयक का मसौदा क्या पेश किया, पूरा देश इसी पर चर्चा में मशगूल हो गया है। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका विरोध किया तो उनकी सहयोगी भाजपा की उप मुख्यमंत्री रेणु देवी, पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल अपने-अपने तर्कों के साथ नीतीश कुमार की सोच को बेकार बताने पर अमादा हैं। यहां तक कि नीतीश कुमार की पार्टी के संसदीय दल के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भी योगी आदित्यनाथ का पक्ष लिया। जनसंख्या नियंत्रण के इस मसौदे पर सिर्फ बिहार और उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर भी इस पर बहस आम हो गई है। ऐसे में इस बहस में एक खास शख्सियत की इंट्री हुई है और वे हैं भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार और गोरखपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद रवि किशन।

खास यह है कि संसद के 19 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में भाजपा सांसद रविकिशन जनसंख्या नियंत्रण पर और किरोड़ी लाल मीणा समान नागरिक संहिता पर प्राइवेट बिल लायेंगे। दोनों के बिल 24 जुलाई को सदन में आयेंगे। अब लोगों के बीच भाजपा सांसद रवि किशन द्वारा जनसंख्या नियंत्रण पर प्राइवेट बिल लाना लोगों को नागवार गुजर रहा है। उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण के प्रस्ताव का जो मसौदा पेश किया गया है उसमें साफ है कि दो से अधिक बच्चों के अभिभावकों को राज्य सरकार की तमाम योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया जायेगा। न तो सरकारी वजीफा मिलेगा और न ही सरकारी नौकरी। अब गोरखपुर के सांसद रवि किशन प्राइवेट बिल पेश करने के फैसले ने इंटरनेट पर एक बहस छेड़ दी है, क्योंकि दिलचस्प बात यह है कि रवि किशन खुद चार बच्चों के पिता हैं। उनकी तीन बेटी है और एक बेटा।

साफ समझा जा सकता है कि बेटे के इंतजार में तीन बेटियां हुईं। और अब चार संतानों के साथ रवि किशन संसद में जनसंख्या नियंत्रण का प्राइवेट बिल पेश करेंगे तो निश्चित रूप से फसाना तो बनेगा ही। जहां कई लोगों ने इसे सांसद के मोर्चे पर पाखंडी रुख बताया, वहीं कुछ लोगों ने दूसरों से दूसरे पक्ष को देखने का आग्रह किया और इस रुख का पूरा समर्थन किया है। भारत अभी भी जनसंख्या नियंत्रण का समर्थन करने वाले विधेयकों को स्वीकार करने से बहुत दूर है। एक ऐसे देश में जहां अभी भी एक बेटा पैदा करने की इच्छा बनी हुई है, भारत के इतने सारे हिस्सों में कन्या भ्रूण हत्या की उच्च दर है, जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिये लोगों को शिक्षित करने के लिये सरकार की ओर से निश्चित रूप से बहुत प्रयास करना होगा। (Input : LiveBavaal)

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