लंदन में लेक्चरर की नौकरी छोड़ लौटीं बिहार, ‘रेशमी गर्ल’ ने रेशम से पैदा किया रोजगार

पटना

इनका नाम है मधुलिका चौधरी। चली गई थीं लंदन। लेक्चरर की नौकरी कर रही थीं वहां। अच्छी-खासी नौकरी चल रही थी। फिर भी इसे छोड़ दी। तीन साल पहले लौट आईं अपने गांव। यहां उन्होंने रेशम की खेती करनी शुरू कर दी। आज की तारीख में वे रेशमी गर्ल के नाम से जानी जा रही हैं।

उन्होंने जिस जमीन पर खेती शुरू की थी, उसी जमीन पर उन्होंने उद्योग लगा दिया है। गांव की दर्जनों महिलाएं उनकी वजह से रोजगार पा सकी हैं। कटिहार जिले के फलका प्रखंड के बरेटा गांव से मधुलिका नाता रखती हैं। महात्मा गांधी के मिशन चलो गांव की ओर ने मधुलिका को बहुत प्रभावित किया था।

बुनकरों को पहचाने दिलाने की कोशिश

बुनकरों को सशक्त बनाने की उनकी चाहत है। वे चाहती हैं कि इस देश के बुनकरों को उनकी असल पहचान मिले। इसीलिए वे अपनी तरफ से छोटी सी कोशिश करने में जुटी हुई हैं। मधुलिका का कहना है कि रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने जिस तरीके से खास ध्यान दिया है, उसकी वजह से देश का मनोबल बढ़ गया है।

बेंगलुरु से लेकर आई थीं रेशम का कीड़ा

रेशम उत्पादन के लिए रेशम का कीड़ा मधुलिका बेंगलुरु से लेकर आई थीं। उनके खेत को कोई देख ले तो यही कहेगा कि यहां तो सोने की खेती हो रही है। बड़े पैमाने पर अब वे रेशम का उत्पादन कर रही हैं। बाजार ढूंढने तक की उन्हें जरूरत नहीं होती है। उनके खेतों तक बाजार खुद पहुंच जा रहा है। हजार रुपया प्रति किलो की दर से उनकी रेशम बिक रही है।

जलवायु है यहां की अनुकूल

सबसे बड़ी बात है कि मधुलिका ने पूरी तरीके से अपने आपको रेशम की खेती के प्रति समर्पित कर दिया है। जलवायु को लेकर मधुलिका कहती हैं कि उनके गांव फलका की जलवायु पूरी तरीके से रेशम की खेती के लिए अनुकूल है। यदि और भी लोग उनके गांव के यह खेती करना चाहते हैं तो उनकी मदद वे खुशी-खुशी करेंगी। मधुलिका के मुताबिक परंपरागत खेती से हटकर यदि रेशम की खेती की जाए तो वास्तव में यह बड़ा फायदेमंद साबित होता है।

देती है इन्हें अपनी सफलता का श्रेय

अपने पिता नवल किशोर चौधरी को वे अपनी कामयाबी का श्रेय देती हैं, जो कि एक सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। इसके अलावा वे अपनी चाचा राजू चौधरी का भी आभार व्यक्त करती हैं और अपनी कामयाबी के लिए वे अपने पति डेविस टोरंटो की भी आभारी हैं, जिन्होंने उन्हें बड़ा सहयोग किया है।

मधुलिका जैसा बनना चाहता है हर कोई

फलका की प्रखंड विकास पदाधिकारी मधु देवी भी मधुलिका की इस सफलता से बहुत ही हर्षित हैं। उनका कहना है कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में मधुलिका का यह कदम बहुत ही कारगर साबित हो रहा है। यही वजह है कि आज इस गांव में हर कोई मधुलिका जैसा बनना चाहता है।

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