सांसद पशुपति पारस और सांसद चिराग पासवान की फाइल फोटो

अपमान का बदला – पारस जब CM नीतीश के पक्ष में बोले थे तो चिराग ने दी थी पार्टी से निकालने की धमकी

Patna : लोक जनशक्ति पार्टी में पिछले दो दिन में जो हुआ है और अभी भी हो रहा है उसकी पाटकथा बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ही लिखी गई थी। यह अपमान और द्वेष की पृष्ठभूमि पर लिखी गई। अपमान भी चाचा का और द्वेष सहयोगियों का। भतीजा अपनी नई-नई सर्वागीर्ण ताकत के मद में चूर था। बताते हैं कि इन दिनों पार्टी में अंदरूनी स्तर पर एनडीए में रहते हुये नीतीश कुमार से तकरार के बीच चाचा भतीजे में रस्साकशी बढ़ गई थी। इसी दौरान जब सांसद पशुपति पारस ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ कर दी। बस क्या था। भतीजे चिराग पासवान को ताव आ गया। उन्होंने भरी भीड़ में अपने चाचा को पार्टी से निकाल देने की धमकी दे डाली। पशुपति पारस ने भी गुस्से में ही जवाब दिया और कहा आज से तुम्हारे चाचा मर गये समझो। एक वो दिन था। अपमान का। और एक आज का दिन है जब पारस ने अपने उस अपमान का बदला ले लिया।

 

पारस को दुख इस बात का था कि जिस लहजे से चिराग ने बात की कभी बड़े भाई राम विलास पासवान ने भी नहीं की थी। चिराग के लहजे से लिहाज गायब था। पशुपति पारस ने बस इतना ही कहा कि अब समझो कि तुम्हारा चाचा भी मर गया। उस घटना के बाद चिराग पासवान विधानसभा चुनाव को लेकर एकतरफा फैसला लेते रहे। चाचा पशुपति पारस ने कभी उसमें हस्तक्षेप नहीं किया। वक्त का इंतजार करते रहे।
इधर जनता दल यूनाइटेड ने विधानसभा उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी को पशुपति पारस से बातचीत का जिम्मा सौंपा। पारस और हजारी आपस में ममेरे भाई हैं। महेश्वर हजारी और ललन सिंह लगातार दिल्ली में कैंप कर रहे थे। ललन सिंह और हजारी ने मिलकर पशुपति पारस को अपने पक्ष में किया। ललन सिंह ने जाति और पुराने रिश्तों का हवाला देकर सूरजभान सिंह को अपने पक्ष में किया। अभी मुंगेर से ललन सिंह सांसद हैं, वहां से सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा सिंह सांसद थीं, लेकिन ललन सिंह के नाम पर उन्होंने अपनी सीट छोड़ दी। फिर, सूरजभान के भाई चंदन सिंह ने नवादा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस बीच जब सांसद चंदन सिंह की तबियत खराब हुई थी तो CM नीतीश कुमार ने अपनी देखरेख में उनका इलाज कराया। ऐसे में चंदन अपने आप जदयू के नजदीकी हो गये।
चौधरी महबूब अली कैसर को मनाने की जिम्मेदारी महेश्वर हजारी ने उठाई थी। कैसर राजनीति के मंझे खिलाड़ी हैं। जब उन्होंने अपने बेटे को राजद से विधायक बनवाया, तब से लग रहा था कि वो नीतीश के साथ जाने का मौका नहीं गंवाना चाहेंगे। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान जब उनकी उम्मीदवारी पर पेंच फंसा था, तब नीतीश कुमार ने रामविलास पासवान को कह कर उनको टिकट दिलवाया था। कैसर इस अहसान से भी दबे थे।वैशाली की सांसद वीणा देवी और उनके पति दिनेश प्रसाद सिंह जो जदयू से निलम्बित एमएलसी हैं, वो नीतीश कुमार से अपने सम्बंध फिर से सुधारने को लेकर आतुर थे और उन्होंने ऑपरेशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

 

रामविलास पासवान के दोनों भाई पशुपति पारस और रामचंद्र पासवान आपस में साढू हैं, दोनों की शादी सगी बहनों से हुई थी। इसलिए रिश्ते में समस्तीपुर सांसद प्रिंस के मौसा हैं पशुपति पारस। इस ऑपरेशन में पारस और प्रिंस की रिश्तेदारी ने मजबूत कड़ी निभाई। वहीं पंजाबी मां का बेटा होने के कारण रिश्तेदारी में चिराग अलग-थलग रह गए। बता दें कि रामविलास पासवान ने दो शादियां की थीं। उनकी पहली शादी 1960 में राजकुमारी देवी से तो दूसरी रीना से 1983 में हुई थी। पंजाबी फैमिली से तालुक रखने वाली रीना शर्मा पेशे से एयर होस्टेस थीं और एक सफर के दौरान ही रामविलास और उनकी पहली मुलाकात हुई थी, बाद में राजकुमारी देवी से तलाक लेकर रीना शर्मा से शादी की थी। रामविलास पासवान का गांव से बहुत संबंध नहीं रह गया था। हालांकि पहली पत्नी से उनकी दो बेटियां आशा और उषा है। वहीं रीना शर्मा से उन्हें एक बेटी और एक बेटा चिराग है।

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