कभी मिस बिहार रनरअप रहीं रिचा राजपूत, आज बिहार की इस बेटी का काम जान होगा गर्व

पटना

रिचा कभी मशहूर प्रतियोगिता मिस बिहार की रनरअप रहीं। चाहतीं तो आराम से फैशन और मॉडलिंग की दुनिया में कैरियर बना सकती थीं। लेकिन बिहार की इस बिटिया का अपनी मिट्टी से ऐसा जुड़ाव है कि उन्होंने इसे ही आगे बढ़ाने में अपने जीवन को लगाने का फैसला लिया। रिचा राजपूत आज उन युवाओं का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, जो आधुनिकता और चकाचौंध से भरी दुनिया की तरफ भागने की बजाय अपनी संस्कृति, अपनी पहचान, अपनी मिट्टी को समृद्ध बनाने में जुटा हुआ है। रिचा राजपूत और उनकी फर्म द केदार हाउस की कहानी कुछ ऐसी ही है।

सहरसा की रहने वाली रिचा की पढ़ाई बिहार में ही

रिचा की कहानी परफेक्ट स्माल टाउन गर्ल वाली है। रिचा ने मधेपुरा के एसएनएमपी हाई स्कूल से स्कूली शिक्षा हासिल करने के बाद आरजेएम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद वह मास्टर्स करने पटना के एएन कॉलेज चली आईं। रिचा ने उसका बाद मधुबन पेंटिंग का कोर्स भी किया। रिचा की हाइट अच्छी तो उनके फ्रेंड्स उन्हें मॉडलिंग की सलाह देते थे। पढ़ाई के दौरान रिचा को मॉडलिंग के ऑफर भी मिले। रिचा मिस बिहार की रनरअप भी रहीं। लेकिन उन्हें लगा कि फैशन जगत में खासकर बिहार की संस्कृति मिसिंग है और यही विचार द केदार हाउस शुरू करने का जरिया बना।

परदादा के नाम को भी बढ़ा रहीं आगे

रिचा बताती हैं कि केदार उनके परदादा का नाम था। इसी नाम पर उन्होंने अपनी फर्म का नाम द केदार हाउस रखा है। इसकी शुरुआत 2016 में हुई थी। केदार हाउस मिथिला, मधुबनी पेंटिंग और अब तो भोजपुरी आर्ट को भी फैशन से जोड़ने में जुटा हुआ है। रिच बताती हैं कि केदार हाउस तीन लक्ष्यों को लेकर काम करता है। पहला मिथिला पेंटिंग को फैशन में लाना। दूसरी चीज है जागरुकता फैलाना कि मिथिला पेंटिंग महत्वपूर्ण क्यों है। तीसरा ये कि जो औरतें सक्षम नहीं हैं उन्हें मुफ्त में ट्रेनिंग देना और उन्हें रोजगार देना।

लॉकडाउन के दौरान भोजपुरी आर्ट पर किया काम

भोजपुरी आर्ट भी एक ऐसी विधा है, जिससे खासपर भोजपुरी समाज ही परिचित नहीं है। रिचा राजपूत मधुबनी संग भोजपुरी आर्ट को भी नया जीवन देने में जुटी हैं। रिचा ने 2015 में मधुबनी पेंटिंग का काम शुरू किया था। लेकिन धीरे धीरे उनका फोकस पूरे बिहार के क्राफ्ट की तरफ हुआ। इस साल कोरोना महामारी ने जब दस्तक दी तो देश में मार्च में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई। रिचा ने इस दौरान भोजपुरी आर्ट पर काम शुरू किया। रिचा बताती हैं कि भोजपुरी आर्ट काफी पुराना है। उन्होंने कोहबर और पिरिया आधारित आर्ट तैयार किए। इसमें नैचुलर रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। रिचा ने भी ऐसा ही किया।

ये सब इतना आसान नहीं था

ऐसा नहीं था कि रिचा राजपूत के लिए ये सब करना इतना आसान था। असल में बिहार के लोग इसे आर्ट तो समझते हैं और अपनाते भी हैं लेकिन इसे फैशन के तौर पर अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करना एक चुनौती थी। ऐसे में रिचा राजपूत ने बिहार की इन कलाओं को फैशन से जोड़ा। उदाहरण के लिए उन्होंने मधुबनी पेंटिंग आधारित टी शर्ट, हॉट पैंट इत्यादि डिजाइन किए। मधुबनी की साड़ियां, सूट को इंट्रोड्यूस किया।

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