70 बनाम 65 का चक्कर: क्या बीच मंझधार में तेजस्वी का साथ छोड़ेगी कांग्रेस

पटना

राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। खासकर तब जब बात हिंदी पट्टी की राजनीति की और उसमें भी बिहार की राजनीति की हो तो कुछ भी संभव है। अब देखिए न, कल तक कंधे से कंधा मिलाकर बिहार में एनडीए को धूल चटाने का दावा करने वाले राजद और कांग्रेस के बीच ही दरार की बड़ी खबर सामने आ रही है। मामला यहां तक पहुंच गया है कि बिहार चुनाव में कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय एक बड़ा शिगूफा छोड़कर दिल्ली रवाना हो गए हैं। हालांकि राजद भी इस बार समझौते के मूड में कत्तई नहीं दिख रही है। राजद की भी तरफ से कांग्रेस को एक तरफ का अल्टीमेटम दे दिया गया है। आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि मामला फंस कहां रहा है और दोनों ओर के तर्क क्या क्या हैं।

पहले जानिए 65 बनाम 70 का चक्कर

आपको बता दें कि कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय 243 सीटों पर प्रत्याशियों का नाम ले चुके हैं। इनका नाम लेकर वो दिल्ली लौट चुके हैं। अब खेल यहीं है। कांग्रेस 243 सीट पर प्रत्याशी का नाम क्यों ढूंढ रही है? इसी सवाल का जवाब है 65 बनाम 70 का चक्कर। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजद ने महागठबंधन के कोटे में कांग्रेस को 65 सीटें देने की बात कही हैं। वहीं कांग्रेस का कहना है कि इस बार 70 सीटों से कम पर समझौता नहीं होगा। एक दूसरी थिअरी में बताया गया है कि राजद ने 58 सीटों का प्रस्ताव दिया है औऱ साथ ही लोकसभा की एक सीट भी उपचुनाव के लिए ऑफर की है। लेकिन पेच इसी बात पर फंस गया है।

कांग्रेस को चाहिए 70

कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय का कहना है कि जिलों से मिली फीडबैक से आलाकमान को अवगत कराया जाएगा। फिर 243 नाम क्यों? राजनीति के जानकारों का कहना है कि दरअसल ये दबाव की राजनीति है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस महागठबंधन में बातचीत के रास्ते ही आगे बढ़ने को प्राथमिकता दे रही है लेकिन सीटें कम दी गईं तो पार्टी अकेले भी सारी सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। असल में महागठबंधन में घटक दलों की संख्या काफी बढ़ गई है। राजद को अपने कोटो में से विकासशील इंसान पार्टी और झामुमो को भी सीटें देनी हैं। इसी तरह कांग्रेस को अपने कोटे में से एनसीपी को सीट देनी है। इसके अलावा वाम दल भी हैं। ऐसे में महागठबंधन का मामला कहां जाएगा अभी वक्त बताएगा।

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राजद ने कांग्रेस को याद दिलाया 2019 का चुनाव

इस बीच राजद ने भी इस पूरे मामले में कड़ा रुख दिखाया है। राजद प्रवक्ता ने कांग्रेस को 2019 का चुनाव यादं दिलाते हुए कहा है कि वह चुनाव राजद ने राहुल गांधी के चेहरे पर लड़ा था। राजद नेता का तर्क है कि इसी तरह कांग्रेस को भी तेजस्वी यादव को सीएम कैंडिडेट घोषित कर एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहिए। वो इस संबंध में झारखंड का उदाहरण दे रहे हैं। तब कांग्रेस समेत सभी घटक दलों ने हेमंत सोरेन को सीएम कैंडिडेट मानकर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में महागठबंधन को जीत मिली थी। हालांकि अब कांग्रेस आलाकमान का फैसला ही बताएगा कि वह राजद नेता के इस तर्क को कितना गंभीरता से ले रही हैं।

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