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संजय राउत बोले- बिहार में भाजपा को नीतीश सरकार से तत्काल समर्थन वापस ले लेना चाहिये

Patna : शिवसेना सांसद संजय राउत ने रविवार को जनसंख्या नियंत्रण पर उत्तर प्रदेश सरकार के प्रस्तावित मसौदा विधेयक का स्वागत किया है और कहा कि अगर जद (यू) नेता इस कानून का विरोध करते हैं तो भाजपा को बिहार में नीतीश कुमार सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिये। जनसंख्या नियंत्रण विधेयक के मसौदे के अनुसार यूपी में दो से अधिक बच्चे वाले लोगों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने, सरकारी नौकरियों के लिये आवेदन करने या किसी भी तरह की सब्सिडी प्राप्त करने से रोक दिया जायेगा। शिवसेना के मुखपत्र सामना में अपने साप्ताहिक कॉलम में राउत ने यह भी सवाल किया कि क्या प्रस्तावित विधेयक ईमानदार इरादे से लाया जा रहा है और कहा कि मुद्दा (जनसंख्या नियंत्रण का) जाति, धर्म या राजनीति से परे होना चाहिये।

 

सामना के कार्यकारी संपादक राउत ने कहा- राम मंदिर का मुद्दा सुलझ गया है इसलिये उस मुद्दे पर वोट नहीं मांगा जा सकता। कहा जा रहा है कि जनसंख्या नियंत्रण विधेयक का उद्देश्य विधानसभा चुनाव (अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश में) से पहले मतदाताओं का ध्रुवीकरण करना है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बिल को ‘मुस्लिम विरोधी’ बताते हुये इसका विरोध किया है। यह देखते हुये कि उत्तर प्रदेश और बिहार की आबादी लगभग 15 करोड़ है और अधिकांश लोग आजीविका की तलाश में दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, राउत ने कहा कि जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिये इन राज्यों में कानूनी कदम उठाये जाने चाहिये।
उन्होंने लिखा है- योगी आदित्यनाथ को इस पहल के लिये बधाई दी जानी चाहिये और अगर नीतीश कुमार इस बिल का विरोध करते हैं तो बीजेपी को बिहार सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिये। 1947 में आजादी के बाद भारत के विभाजन को याद करते हुये राउत ने कहा कि देश एक धर्मनिरपेक्ष राज्य बन गया जहां “हिंदुओं को धर्मनिरपेक्षतावादी के रूप में रहने के लिये मजबूर किया गया, जबकि मुसलमानों और अन्य धर्मों के सदस्यों को धार्मिक स्वतंत्रता का आनंद मिला।” ये लोग जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन में विश्वास नहीं करते हैं। उनकी स्वतंत्रता की भावना एक से अधिक पत्नियां रखने और बच्चों को जन्म देने में है…जाहिर है, देश की जनसंख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन उनमें से अधिकांश अनपढ़ हैं और बेरोजगार हैं।
राउत ने दावा किया कि आठ राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गये हैं। राज्यसभा सांसद ने कहा- अवैध प्रवासी (पड़ोसी बांग्लादेश से) के कारण, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में जनसंख्या जनसांख्यिकी बदल गई है। विश्व हिंदू परिषद ने मसौदा विधेयक का विरोध करते हुये कहा कि हिंदू समुदाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और सुझाव दिया कि चीन की जनसंख्या नीति में एक बच्चे के मानदंड से तीन बच्चों का अध्ययन किया जाना चाहिये।

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