बाबा वैद्यनाथ। Image Source : twitter

सावन शुरू, कल पहली सोमवारी : मिट्टी के शिवलिंग बना विधिवत पूजा, रूद्राभिषेक कर सकते हैं

Patna : सावन रविवार से शुरू हो गया है। कोरोना संक्रमण के कारण लगातार दूसरे साल भी देवघर का विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला स्थगित कर दिया गया है। बाबा मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी है। इस बार 26 जुलाई के साथ-साथ 2, 9 व 16 अगस्त को सोमवारी है। श्रद्धालु सोमवारी व्रत पर विधिवत पूजा करने की तैयारी में जुट चुके हैं। शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों में बने छोटे-छोटे मंदिर कोविड प्रोटोकॉल की बंदी से प्रभावित नहीं हैं। वहां के शिव मंदिरों में नित्य श्रद्धालु पूजा-पाठ करते रहे हैं। लेकिन, जहां के मंदिर बंद है, वहां भी शिव भक्तों को व्रतादि संपन्न करने में कोई परेशानी नहीं है। पुरोहितों का कहना है कि सनातन धर्म में देवताओं के आवाहन व विसर्जन करने का विधान है। इसलिए श्रद्धालुगण श्रावण में मिट्टी से लिंग बनाकर विधिवत पूजा के साथ ही रूद्राभिषेक भी कर सकते हैं। इसमें भी परेशानी होने पर श्रद्धालु फोटो रखकर भी पूजा कर सकते हैं।

 

आयुष्मान योग में सावन मास के आरंभ होने से महादेव की उपासना करने वाले श्रद्धालुओं को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होगा। सावन में सोमवार दिन का विशेष महत्व होता है। महिलाएं सुहाग की सलामती के लिये शिव-पार्वती का व्रत रखती हैं। इसबार सावन में चार सोमवार का अनूठा संयोग बना है। दो कृष्ण पक्ष और दो शुक्ल पक्ष में होंगे। पहली सोमवारी को सौभाग्य योग तो दूसरी व चौथी सोमवारी को सर्वार्थ सिद्धि योग विद्यमान रहेगा। शुक्ल पक्ष में अष्टमी-नवमी एक दिन होने से इसबार सावन 29 दिनों का होगा। सभी योगों में सर्वार्थ सिद्धि योग सबसे उत्तम माना गया है।
वैसे इस बार भी बड़े शिवालयों के बंद होने, कांवड़ यात्रा पर की वजह से व्यवसायियों को बड़ा झटका लगा है। चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने कहा है कि कांवड़ यात्रा नहीं होने से करीब 500 करोड़ के व्यापार के नुकसान की आशंका है। कांवड़ यात्रा के दौरान गेरुआ, अंगोछा, धोती, गंजी, हाफ पैंट, शर्ट और टी शर्ट की खूब बिक्री होती है। 15 हजार से ज्यादा व्यापारी करीब 350 करोड़ रुपए तक का कारोबार करते हैं। इसके लिए मई और जून से ही ऑर्डर दिये जाते हैं। कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगने से सभी ऑर्डर कैंसिल हो गये। ऐसे में व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ। कांवर बनाने वालों को भी सालभर सावन का इंतजार रहता है। सेवा शिविर लगाये जाते हैं। इसके लिये टेंट, जेनेरेटर, डीजे, बड़ी लाइटों की मांग रहती थी। इस बार इस कारोबार पर भी ग्रहण लग गया।

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