लीची।

मुजफ्फरपुर की शाही लीची अब छपरा-सीवान, पटना-गया में भी उपजेगी, दक्षिण भारत में भी भेजे जा रहे पौधे

पटना : बिहार में शाही लीची की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुजफ्फरपुर की शाही लीची की खेती अब आधा दर्जन अन्य जिलों में भी की जाएगी। सूबे में करीब 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल बढ़ाने की योजना पर काम जारी है। अगले पांच साल में लक्ष्य को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। पहले चरण में इस साल 50 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इतना ही नहीं दक्षिण भारत में भी शाही लीची के पौधे भेजे जा रहे हैं। मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुशहरी और जिला कृषि विभाग ने इसकी पहल की है। अनुसंधान केंद्र में इसके लिए 50 हजार पौधे तैयार भी किए गए हैं। एक हेक्टेयर में 100 पौधे लगाए जाएंगे। जुलाई या अगस्त तक पौधरोपण किया जाएगा। सूबे में छपरा, सीवान, गया, नवगछिया, पटना एवं उसके आसपास के जिलों में भी पौधे लगाने की योजना बनी है।

मुजफ्फरपुर स्थित अनुसंधान केंद्र में तैयार हो रहे लीची के पौधे।

ज्यादा आया है मंजर, बढ़ेगा लीची उत्पादन
सूबे में इस साल लीची के पौधों में मंजर ज्यादा है। अनुसार है कि इस साल लीची का उत्पादन काफी बढ़ेगा। सूबे में फिलहाल 32 हजार हेक्टेयर में लीची उत्पादन होता है। मुजफ्फरपुर में सिर्फ 12 हजार हेक्टेयर में लीची की उपज होती है। पिछले साल की तुलना में इस साल अच्छे उत्पादन होने की उम्मीद है। लीची उत्पादन संघ के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह ने बताया कि पिछले साल भी अच्छा मंजर था, लेकिन मौसम अनुकूल नहीं रहने के कारण अधिकांशत: लीची नष्ट हो गई थी। कुल उत्पादन एक लाख टन की तुलना में सिर्फ 50 हजार टन का ही उत्पादन हो सका था। इस साल भी मंजर है। अब सबकुछ मौसम पर निर्भर करता है। अगर, मौसम अनुकूल रहा तो 75 हजार टन उत्पादन हो सकता है।

तमिलनाडु में छह हजार और कर्नाटक में भेजे गए 3 हजार पौधे
मुजफ्फरपुर की शाही लीची के पौधे बिहार समेत दूसरे प्रदेशों में भी भेजे जा रहे हैं। अब तक मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र से तमिलनाडु में छह हजार पौधे भेजे गए हैं। इसके अलावा कर्नाटक और केरल में तीन-तीन हजार पौधे भेजे गए हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश के एक दर्जन से अधिक किसान लीची के पौधे लेने के लिए लगातार संपर्क साध रहे हैं। लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. शेषधर पांडेय ने बताया कि शाही लीची मुजफ्फरपुर की पहचान है। इसकी उत्पादकता को बढ़ाने के लिए क्षेत्रफल का फैलाव किया जा रहा है। 100 रुपए प्रति पौधा उपलब्ध कराया जा रहा है।

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