जूतों की लॉन्ड्री! बिहार की बेटी का आइडिया हिट, बस 1 लाख से शुरुआत, बना बड़ा कारोबार

पटना

आपने लॉन्ड्री के बारे में जरूर सुना होगा या निश्चित रूप से लॉन्ड्री सर्विस का इस्तेमाल किया होगा। कपड़ों के शौकीन लोग लॉन्ड्री की जरूरतों को अच्छे से समझते भी हैं। लेकिन अगर हम आपसे जूतों की यानी शू लॉन्ड्री की बात करें तो? निश्चित तौर पर आप हैरान हो जाएंगे। अधिकतर लोगों ने जूतों की लॉन्ड्री नहीं देखी होगी। लेकिन बिहार की बेटी न केवल जूों की लॉन्ड्री चला रही है बल्कि आत्मिर्भर बन कई महिलाओं को रोजगार भी दे रही है। ये कहानी भागलपुर की शाजिया कैसर की है। शाजिया का स्टार्टअप, देश के सक्सेस स्टॉर्टअप की लिस्ट में शामिल भी हो चुका है और पीएम मोदी बकायदा इसपर आधारित किताब भी लॉन्च कर चुके हैं। शाजिया जैसी लड़कियां आज के जमाने में हम सभी के लिए हौसला हैं कि अगर आइडिया और जुनून हो, तो नौकरी मांगने की बजाया नौकरी देने की क्षमता हासिल की जा सकती है।

पहले जानिए कि शाजिया के दिमाग में ये आइडिया कहां से आया

आप समझ लीजिए कि पूरा खेल आइडिया का है। अब जैसे फेसबुक को ही लीजिए। मार्क जकरबर्ग को पहले आइडिया ही तो आया कि लोगों की सोशल एक्टिविटी के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाया जाए। और आज इसी आइडिया से मार्क दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में शामिल हैं। शाजिया की पढ़ाई लिखाई फिजियोथेरेपी की हुई थी। उन्होंने WHO जैसे बड़े संस्थानों के लिए काम भी किया। किसी मैग्जीन में उन्होंने शू क्लीनिंग सर्विस के बारे में पढ़ा। वहीं से शू लॉन्ड्री का आइडिया क्लिक हुआ।

शुरुआत में घर वाले भी थे खफा

शाजिया को क्या सफलता इतनी आसानी से मिल गई? इसका जवाब ना में है। आसानी से कुछ नहीं मिलता। शाजिया ने भी अपने हक की मेहनत खूब की। हालात तो ऐसे थे कि शाजिया के मायके और ससुराल वाले इस काम को सपोर्ट नहीं कर रहे थे। उनको लगता था कि इतना पढ़ लिखकर बिटिया क्या अब जूतों की सफाई करेगी। लोगों को लगता कि ये तो मोची का काम है। लेकिन नए जमाने से रुबरू हो रही शाजिया जानती थीं कि कोई काम छोटा और बड़ा नहीं होता। उन्हें पता था कि उनका आइडिया यूनिक है और इसे हिट होना ही है। 2014 में उन्होंने रिवाइवल शू लॉन्ड्री का अपना स्टार्टअप शुरू किया। पहला स्टोर पटना के अल्पना मार्केट में खोला गया।

एक लाख से शुरू किया बिजनेस

शाजिया के पास कोई बहुत बड़ी पूंजा नहीं थी। उन्होंने अपनी एक लाख रुपये की सेविंग से ही अपना स्टार्टअप शुरू किया। शुरुआत में तो लोग साथ आने के लिए तैयार ही नहीं हुए। हालात ऐसे बन गए कि 2 सालों तक नुकसान भी झेलना पड़ा। लेकिन कोई कारोबार इतनी आसानी से सफल हो जाता तो बात ही क्या था। शाजिया ने भी हिम्मत नहीं हारी। लगातार इस काम में खुद को झोंके रखा। उन्होंने महिलाओं को ट्रेनिंग देकर अपने साथ जोड़ना शुरू कर दिया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई।

बिहार का बेस्ट स्टार्टअप बना शू लॉन्ड्री

शाजिया कैसर का ये स्टार्टअप बिहार का बेस्ट स्टार्टअप भी चुना जा चुका है। 2017 में देश भर के स्टार्टअप्स में से सफल होने वालों पर सक्सेस स्टोरी नाम से एक किताब छापी गई थी। सिविल सर्विसेज डे पर पीएम मोदी ने इस किताब का विमोचन किया था। इसमें बिहार के दो स्टार्टअप की सक्सेस स्टोरी शामिल की गई थीं। एक स्टार्टअप शाजिया कैसर का भी था। ये केवल शाजिया के लिए ही नहीं बल्कि पूरे बिहार के लिए गौरव की बात थी।

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