DMCH में नर्क जैसे हालात- कोविड वार्ड के सामने नालियों का मलबा, जलजमाव और सूअर की सैर

New Delhi : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाद बिहार के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेजों में से एक दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में सुविधाओं की स्थिति दयनीय हो गई है। समस्तीपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर और सहरसा, सुपौल समेत कई जिलों के निवासी डीएमसीएच पर निर्भर हैं लेकिन इस मेडिकल कॉलेज का दौरा नर्क की याद दिलाता है। कचरे से भरे और जलजमाव से भरे अस्पताल परिसर में सुअर और गाय विचरते रहते हैं। आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात नर्सों को गंदे पानी से भरी सड़कों को पार करते देखा जा सकता है। एक नर्स दीपा कुमारी ने कहा – पिछले 27 साल से इस स्थिति का सामना कर रही हूं और मानसून के दौरान यह स्थिति और बदतरह हो जाती है। लेकिन फ्रंटलाइन कार्यकर्ता अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा करने के लिए मजबूर हैं।

डीएमसीएच के चिकित्सा अधीक्षक मणिभूषण शर्मा का कार्यालय भी गंदे और सड़े हुए नालों से घिरा हुआ है।खुद को गंदे पानी से बचाने के लिए शर्मा को अपने कार्यालय तक पहुँचने के लिए एक गार्ड और ड्राइवर की मदद लेनी पड़ती है। पूछने पर शर्मा ने कहा कि स्थिति कोई नई नहीं है क्योंकि यह अस्पताल काफी पुराना है और निचले इलाके में स्थित है। कोविड की स्थिति और कोविड रोगियों के लिए सुविधाओं पर उन्होंने कहा कि हम दिन रात लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें भी कोरोना हो गया था। कहा कि उनकी बेटी भी कोविड पॉजिटिव है, लेकिन तमाम बाधाओं के बावजूद, वह मरीजों की रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि डीएमसीएच के एक नए भवन में एक कोविड वार्ड चला रहा है जहां सब कुछ अपग्रेड किया गया है।
हालांकि, डीएमसीएच अधीक्षक कार्यालय के सामने कोविड आईसीयू वार्ड है। आसपास के इलाके में नाले का गंदा पानी भर हुआ है। कोविड आईसीयू वार्ड में कार्यरत डॉक्टर आशुतोष कुमार ने कहा कि डॉक्टर और नर्स भगवान की दया पर हैं, परिसर में कचरे और जल-जमाव से संक्रमण की उच्च आशंका है, लेकिन हम असहाय हैं। नई नर्सों के छात्रावास की सड़क, विशेष रूप से कोविड वार्डों में सेवा करने वालों के लिए क्षतिग्रस्त और नालों के पानी का जल से जमाव है। चंदन, जिसके ससुर गंभीर हैं और कोविड वार्ड में भर्ती है, दवा खरीदने के लिए पानी से भरी सड़क को पार करता है। उन्होंने कहा- हम क्या कर सकते हैं? मुझे हर दिन दवाएं लेने जाना पड़ता है। मुझे उन्हें बाहर से खरीदना पड़ता है।
डीएमसीएच का सर्जरी वार्ड भी इसी तरह खराब स्थिति में है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। सर्जरी वार्ड को भगवान की रहमत पर छोड़कर हालात बिगड़ने के कारण प्रशासन द्वारा आधी इमारत पहले ही खाली कर दी गई है। बिल्डिंग की खराब हालत पर प्रतिक्रिया देते हुए सर्जिकल वार्ड के एक स्टाफ सदस्य ने कहा- हां, हम डरते हैं लेकिन आपको यह सवाल सरकार से पूछना होगा।
दरभंगा के डीडीसी तनय सुल्तानिया ने न्यूज एजेन्सी एएनआई को बताया- परिसर में गंदगी इसलिये है क्योंकि वो पूरा इलाका काफी नीचे है। डीएमसीएस का भवन भी बहुत पुराना है। फिलहाल तो पूरा ध्यान कोविड रोगियों के इलाज पर केंद्रित कर दिया गया है। हमने प्रत्येक शिफ्ट में दो वरिष्ठ डॉक्टर (पीओडी) और चार एसआर / पीजी डॉक्टर हर दिन तीन शिफ्ट में उपलब्ध कराये हैं।

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