जमुई का लाल कुछ इस तरह मेहनत कर बना IAS, आज हर बच्चे के लिए प्रेरणा

अपने बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए मां-बाप कड़ी मेहनत करते हैं। यदि बच्चे भी अपने मां-बाप की मेहनत को समझते हुए थोड़ा जागरूक होकर अच्छी तरह से मेहनत कर लें तो उन्हें भी आखिरकार कामयाबी मिल ही जाती है। हम आपको बिहार के जमुई के रहने वाले सुमित कुमार की कहानी बता रहे हैं, जो कि आपको जरूर प्रेरित करेगी। इन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में 53वीं रैंक हासिल की थी। यह इनका तीसरा प्रयास था।

आईआईटी में मिला था दाखिला

 Sumit Kumar

सबसे पहले तो इन्होंने कठिन मेहनत की थी। आईआईटी में दाखिला ले लिया था। बाद में जब इनकी पढ़ाई पूरी हो गई तो इनके सामने लाखों के पैकेज वाली नौकरी मौजूद थे। फिर भी उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी। यूपीएससी की तैयारी की। अंत में कामयाबी मिल ही गई। सबसे पहले तो इनकी आर्थिक स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं थी। बचपन में इन्हें घर में ज्यादा आरामदायक वातावरण नहीं मिला। फिर भी इनके मां-बाप इनकी पढ़ाई को लेकर हमेशा से गंभीर रहे थे।

बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई

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गांव में कोई अच्छा स्कूल नहीं था। बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। यही कारण था कि जब वे केवल 8 साल के थे, तभी उनके मां-बाप ने पढ़ने के लिए उन्हें बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया था। सुमित के एक छोटे भाई इस वक्त एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। वे भी सुमित से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

ठान लिया था इन्होंने

सुमित ने यूपीएससी के लिए जमकर तैयारी की। उन्होंने यह ठान लिया था कि वे इस परीक्षा में पास हो कर रहेंगे। सबसे पहले उन्होंने जब पहले प्रयास में सफलता हासिल नहीं की, तो 2017 में उन्होंने दूसरी बार कोशिश की थी। इस बार उन्हें 493वीं रैंक मिली थी। उन्होंने इंडियन डिफेंस एस्टेट सर्विस को चुन लिया था। इसके बाद उन्होंने तीसरा प्रयास भी किया। इस बार उन्हें ऑल इंडिया 53वीं रैंक मिल गई।

करते रहें अभ्यास

 Sumit Kumar

सुमित का कहना है कि अभ्यास करते रहने से इस परीक्षा में कामयाबी जरूर मिलती है। सुमित के मुताबिक टेस्ट सीरीज से तैयारी करनी चाहिए। किताबें ज्यादा नहीं पढ़नी चाहिए। कुछ सिलेक्टिव किताबें पढ़ना फायदेमंद होता है और रिवीजन लगातार करते रहना चाहिए। उनके मुताबिक यदि पूरी लगन के साथ और ईमानदारी से मेहनत की जाए, तो कामयाबी आखिरकार मिल ही जाती है।

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