वर्टिकल खेती: पाइप में सब्जी उगा आत्मनिर्भर बनीं बिहार की सुनीता, मशरूम से कमाए लाखों रुपये

पटना

मशहूर साहित्यकार और उपन्यास सम्राट प्रेमचंद ने कभी कहा था कि मानव जीवन में लगन बड़े महत्व की वस्तु है। जिसमें लगन है वह बूढ़ा भी जवान है, जिसनमें लगन नहीं वह जीवन भी निर्जीव है। इसी लगन के भरोसे ही लोग जीवन में मौके नहीं मिलने के बाद भी कुछ कर गुजरते हैं। अब बिहार के सारण की सुनीता को ही लीजिए। आपमें से किसने सोच कि पाइप और बांस में भी सब्जी उगा न केवल घर की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं बल्कि कमाई भी की जा सकती है। लेकिन सुनीता के अंदर की लगन ने उन्हें ये आइडिया दिया और आज ये आइडिया हिट है। सुनीता आज आत्मनिर्भर हैं तो उसके पीछे उनकी लगन ही है। बिहार की सकारात्मक कहानियों में चलिए आज आपको सुनीता की कहानी बताते हैं।

वर्टिकल खेती को बनाया हथियार

आज जब खेतों का रकबा घट रहा है, आबादी बढ़ रही है, लोग खेती-किसानी से विमुख हो रहे हैं तो सुनीता प्रेरणा के रूप में सामने आई हैं। सुनीता बिहार के सारण जिले के एक बरेजा गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने जिस तकनीक का इस्तेमाल सब्जी उगाने में किया है, उसे वर्टिकल खेती कहते हैं। ऐसा नहीं है कि सुनीता को अचानक ही जिन्न का चिराग मिल गया और उन्हें ये आइडिया पता चल गया। सुनीता बताती हैं कि उन्हें सब्जी उगाने का शौक रहा है। घर का कोई बर्तन टूट जाता तो वो उसमें मिट्टी डालकर कुछ न कुछ लगा देती थीं। एक बार एक कबाड़ी वाले के पास उन्हें पाइप दिखा। न जाने उनके मन में क्या आया जो उन्होंने उससे ये पाइप खरीद लिया। पाइप छत पर पड़ा रहा है और उसमें मिट्टी जम गई। बारिश का पानी पड़ा तो पाइप में घास उग आई। बस फिर क्या था, सुनीता को उपाय सूझ गया।

पति भी करते हैं मदद

सुनीता के इस काम में उनके पति सत्येंद्र प्रसाद भी पूरी मदद करते हैं। सुनीता ने उनसे वैसे ही पाइप और मंगाए। फिर उन पाइपों में मिट्टी डाल छेद कर पौधे लगाए गए। आइडिया हिट रहा और सुनीता घर में ही गोभी, बैंगन जैसी सब्जियां उगाने लगीं। सुनीता की सफलता की कहानी कृषि विज्ञान केंद्र तक पहुंची। वहां के अधिकारियों ने सुनीता को प्रदर्शनी लगाने की सलाह दी। आपको जानकर हैरानी होगी कि सुनीता सिर्फ 10वीं पास हैं। आज वह अपने इन प्रयासों से न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि आसपास के लोगों के प्रेरणा का स्रोत भी बनी हुई हैं।

सुनीता को मिला अभिनव पुरस्कार

सुनीता प्रसाद के इन प्रयासों को अब प्रोत्साहन भी मिलना शुरू हुआ है। जब सुनीता ने अपने काम की प्रदर्शनी लगाई तो उन्हें किसान अभिनव सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा डीडी किसान के एक खास शो महिला किसान अवॉर्ड शो में भी सुनीता के काम को शामिल किया गया। आजकल जैविक खेती का क्रेज बढ़ा है। हम अक्सर सुन रहे हैं कि सब्जियों में कीटनाशकों और केमिकल का जबर्दस्त उपयोग किया जा रहा है। सुई देकर सब्जियों का आकार बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में सुनीता का दिखाया रास्ता शहरों में रहने वाले लोगों के भी काम आ सकता है। लोग चाहें तो अपने छतों पर इस तरह पाइप वाली खेती करके सब्जियां उगा सकते हैं। पाइप की जगह बांस का भी प्रयोग हो सकता है। सुनीता के मुताबिक पाइप वाली खेती में जहां पाइप के लिए करीब 800 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं बांस में ये काम महज 100 रुपये के अंदर ही हो जाता है।

मशरूम से सालाना लाखों की आमदनी

सुनीता बताती हैं कि शुरुआत में उन्होंने पोल्ट्री फॉर्म खोला था। हालांकि इस काम में उन्हें फायदा नहीं हुआ। इसके बाद वह मशरूम के उत्पादन में काम करने लगीं। शुरुआत में इसमें भी दिक्कत आई। माल नहीं बिका। फिर धीरे-धीरे सुनीता का काम रफ्तार पकड़ने लगा। मशरूम की खेती से उन्होंने आसपास की महिलाओं को भी जोड़ा। आज वह इसकी मदद से सालाना दो लाख रुपये से अधिक की आमदनी कर ले रही हैं। अब आप सोचिए कि अगर एक गृहिणी सुनीता घर बैठे आमदनी का स्रोत खोज सकती हैं तो ये काम आप क्यों नहीं कर सकते।

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