तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार की फाइल फोटो।

सुप्रीम कोर्ट- बिहार में कानून नहीं, पुलिस राज, तेजस्वी ने पूछा- नीतीश कुमार इस उपलब्धि पर कुछ बोलेंगे?

Patna : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार इस उपलब्धि पर कुछ बोलेंगे। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में बिहार सरकार की खिंचाई करते हुये कहा कि लगता है बिहार में कानून का राज नहीं है बल्कि पुलिस का राज है। इस मामले में बिहार सरकार के कामकाज पर उंगली उठाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में डीआईजी की रिपोर्ट है कि एफआईआर लेट से की गई, बेवजह ड्राइवर को कस्टडी में रखा गया। और इन रिपोर्टों को बिना देखे मामले को चुनौती देने सरकार सुप्रीम कोर्ट आ गई। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार की नजर में अमीर और गरीब एक समान होना चाहिये। ये नहीं कि जो अमीर हैं उनको ज्यादा मुआवजा मिले और जो गरीब है उसको कम मुआवजा दिया जाये।

दरअसल यह पूरा मामला एक ट्रक ड्राइवर को अवैध तरीके से 35 दिनों तक पुलिस हिरासत में रखे जाने और 5 लाख मुआवजा देने के पटना हाईकोर्ट के आदेश से जुड़ा है। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ बिहार सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुये सुप्रीम कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा – जहां किसी गरीब के अधिकारों के उल्लंघन के मामले में मुआवजे का सवाल है तो वह अमीर व रसूखदार शख्स के बराबर होगा। बिहार सरकार की दलील गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी और कहा कि इस मामले में पटना हाईकोर्ट का फैसला एकदम सही है।
जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस शाह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में अपील में नहीं आना चाहिये था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून की नजर में अमीर आदमी और गरीब आदमी एक समान हैं। किसी भी मामले को इस तरह देखा ही नहीं जा सकता कि किसकी आर्थिक स्थिति क्या है? मुआवजा यह देख कर नहीं दिया जा सकता कि जो पीड़ित है वो गरीब है या अमीर। और अगर इस तरह से सरकार सोचती है तो यह बेहद गलत है। बेंच ने कहा कि क्या सरकार ने इस मामले में डीआईजी का बयान नहीं देखा, जिन्होंने हाईकोर्ट में कहा था कि समय पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, संबंधित व्यक्तियों के बयान नहीं लिये गये, ट्रक का इंस्पेक्शन नहीं किया गया और बेवजह ही ड्राइवर को पैंतीस दिनों तक डिटेन किया गया।
बिहार सरकार की अपील में कहा गया था कि राज्य सरकार ने जिम्मेदारी के साथ इस मामले को डील किया और जिम्मेदार एसएचओ को सस्पेंड किया गया है और कार्रवाई चल रही है। लेकिन साथ ही दलील दी कि ड्राइवर के मामले में मुआवजा राशि पांच लाख ज्यादा है। हालांकि क्राइम भी छोटा नहीं था। इस मामले में एक दूध टैंकर के चालक जितेंद्र कुमार को 29 अप्रैल को डिटेन किया गया। जबकि इस मामले की प्राथमिकी पैंतीस दिनों के बाद तीन जून को दर्ज की गई। पटना उच्च न्यायालय को इस मामले में एक शिकायत ई-मेल के जरिये मिली और उसी ईमेल के बाद उच्च न्यायालय ने सुनवाई शुरू की।

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