पहली मुलाकात में पैर छू आशीर्वाद लिया था सुशांत ने, मनोज बोले- विश्वास ही नहीं होता कि वे नहीं रहे

New Delhi : 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत के दुर्भाग्यपूर्ण निधन का एक साल हो जायेगा। टीवी में एक सफल करियर स्थापित करने के बाद दिवंगत अभिनेता ने समीक्षकों द्वारा प्रशंसित और कमर्शियल सक्सेस ‘काई पो चे’ के साथ फिल्मों में शानदार आगाज किया था। उन्होंने पहले ही फिल्म से सबका दिल जीत लिया। अब उनकी यादों में लिपटे एक साल। हमारा सितारा खो गया। ऐसे समय में मनोज बाजपेयी ने उनको याद करते हुये कहा कि मुझे आज भी विश्वास नहीं होता कि अब वो हमारे बीच नहीं रहा। मनोज बाजपेयी ने उनके साथ फिल्म सोनचिरैया में काम किया था। मनोज बाजपेयी को सुशांत अपने गुरु सी मोहब्बत और आदर देते थे। मनोज वाजपेयी से जब एक वेबसाइट ने सुशांत की स्मृतियों के बारे में पूछा तो वे भावविहल हो गये। उन्होंने कहा कि उसे याद करने के एहसास से ही समय ठहर जाता है।

वेबसाइट पिंकविला से बात करते हुये मनोज बाजपेयी ने कहा- अभी जब आपने भूतकाल में मुझसे उसके बारे में पूछा, तो मुझे अचानक लगा कि वह अब हमारे बीच नहीं है। लेकिन मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वह अब हमारे बीच नहीं हैं। सोनचिरैया की शूटिंग के दौरान, हम एक साथ पार्टी करते थे और उन्हें सितारों और ग्रहों को देखने में काफी दिलचस्पी थी। उसके पास एक महंगी दूरबीन थी जिसे वह अपने साथ ले जाता था। ​हमें सितारों को दिखाने के लिये इस्तेमाल करता था और बहुत कुछ समझाता भी था। आकाशगंगा और ग्रहों के बारे में उसकी समझ उत्कृष्ट थी। वो हमेशा आकाशगंगा पर समझाता था। मेरे जीवन में उसकी यह स्मृति बेहद प्रिय है।
मनोज बाजपेयी ने अपने पहले एक इंटव्यू में सुशांत को याद करते हुये कहा था कि कैसे वे सोनचिरैया के सेट पर जब पहले दिन पहुंचे तो उनके पांव छू लिये और प्रणाम किया। उसके इस एक व्यवहार ने उसको लेकर नजरिया ही बदल दिया। उन्होंने याद करते हुये कहा था- पहले दिन सोनचिरैया के सेट पर मेरे पास आया और अचानक उसने मेरे पैर छू लिये। उनको लेकर जो धारणाएं तैर रहीं थीं, सब उड़नछू हो गईं। ऐसा नहीं है कि उसने मेरे पैर छुये… यह सिर्फ उसकी पृष्ठभूमि के बारे में बहुत कुछ कहता है। वह कहां से आया है, इसने बस इतना ही किया। वहीं से एक अभिनेता के रूप में, एक व्यक्ति के रूप में एक दूसरे को जानने की हमारी यात्रा शुरू हुई।
मनोज बाजपेयी ने याद किया कि सुशांत सिंह राजपूत ने तब उन्हें बताया था कि वह भी बिहार से हैं और अपने गांव के बारे में बताया। सुशांत सिंह राजपूत ने बैंडिट क्वीन के बारे में भी की। हर दिन, उसे दूर से देखना, शॉट पर काम करना, अपने आर्ट पर काम करना, उस फाइनल को पाने के लिये उसके दृष्टिकोण पर काम करना, सही रन या जंप या डायलॉग डिलीवरी या शब्द पर सही जोर देना। सबकुछ बेहद शानदार था।
इधर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे ने उन्हें याद करते हुये कहा- मुझे याद है कि हम धोनी के हेलीकॉप्टर शॉट के लिये अभ्यास कर रहे थे। और हमने 14 दिनों तक कोशिश की, लेकिन वह टच नहीं मिल रहा था। हालाँकि, जिस दिन उसने हेलीकॉप्टर शॉट को इमीटेट किया, वह एक छोटे बच्चे की तरह था और बहुत उत्साहित था। मैंने उन्हें बीसीसीआई की टीम इंडिया जैकेट भेंट की थी। सुशांत इसके लिये इतने भावुक थे और उन्होंने इसे एक-दो बार पहना भी था। और जर्सी पहने हुये उन्होंने अपनी एक फोटो भी ट्वीट की थी। सुशांत बहुत अच्छे स्टूडेंट, लिसनर और बेहद मेहनती व्यक्तित्व थे। वास्तव में, उन्होंने एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी के लिए जो कड़ी मेहनत की, वह अविश्वसनीय थी। वह वास्तव में आदर्श धोनी थे।

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