प्रतीकात्मक तस्वीर। Image Source : Ranjit Kumar

कोरोना, वायरल बुखार और डेंगू के बाद स्वाइन फ्लू की दस्तक- हॉस्पिटल में मरीजों को स्ट्रेचर तक की सुविधा नहीं

Patna : प्रदेश में कोरोना, वायरल और डेंगू के बाद स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है। कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका अभी खत्म नहीं हुई है कि शहर और जिले में स्वाइन फ्लू फैलने लगा है। स्वाइन फ्लू (H1N1) से पीड़ित तीन मरीजों को पारस एचएमआरआई में भर्ती कराया गया था। इनमें से दो को छुट्टी मिल गई। स्वाइन फ्लू के एक मरीज को 27 जुलाई को, दूसरे को 3 अगस्त को और तीसरे मरीज को 5 सितंबर को भर्ती कराया गया था, जबकि सीतामढ़ी के एक 60 वर्षीय मरीज का इलाज चल रहा है। मरीज फिलहाल आईसीयू में है। वैसे कई भारतीय राज्यों में बच्चों में वायरल बुखार के मामले बढ़ रहे हैं। अब तक के निष्कर्ष बताते हैं कि बुखार के पीछे के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग हैं। उत्तर प्रदेश डेंगू से जूझ रहा है जबकि बिहार, नोएडा और दिल्ली के अधिकारी डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू और टाइफाइड के अलावा मौसमी इन्फ्लूएंजा जैसे संक्रमण के उच्च मामलों का निदान कर रहे हैं।

दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में, बाल रोग विशेषज्ञों को भी इन्फ्लूएंजा निमोनिया के मामले मिल रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ये बीमारियाँ उन बच्चों के लिये घातक साबित हो रही हैं जो या तो नवजात हैं या कुपोषित हैं। अन्य बच्चे उपलब्ध उपचारों के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीज को सामान्य फ्लू की तरह ही दवा दी जाती है। सांस की तकलीफ होने पर या कुछ मरीजों की हालत गंभीर होने पर एंटीवायरल दवा चलती है। रोगी को आराम करने और बुखार की दवा लेने की सलाह दी जाती है। रोगी आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन डॉक्टरी सलाह जरूर लेनी चाहिये।
सूअर से इंसान में स्वाइन फ्लू फैलता है। फिर संक्रमण एक से दूसरे में फैलने लगता है। इसलिए बचाव ही बेहतर इलाज है। पटना एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. रवि कीर्ति के मुताबिक फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं। जैसे सर्दी, खांसी, बुखार, सिर और शरीर में दर्द, छींक आना और नाक से पानी आना आदि। कुछ रोगियों को सांस लेने में भी तकलीफ होती है। नीति आयोग के अध्यक्ष डॉ वीके पॉल ने एक प्रेस वार्ता में कहा- कोविड के अलावा डेंगू और मलेरिया से लड़ने के लिये हमारे पास पर्याप्त तैयारी होनी चाहिये, क्योंकि ये मामले बढ़ रहे हैं और मानसून के मौसम के कारण भी। हमें खुद को ढंकना चाहिये और मच्छर भगाने वाली, मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिये और मच्छरों को पनपने नहीं देना चाहिये।

इस साल वायरल बुखार के मामले असामान्य रूप से अधिक हैं। हालांकि, इससे संबंधित कोई मृत्यु दर नहीं है और बच्चे उपचार के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। गोपालगंज इलाके से दो मौतें दर्ज की हैं, जहां परिवारों ने बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने में देरी की। बिहार के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक वायरल फीवर के मामले अन्य वर्षों की तुलना में कम से कम 20 फीसदी ज्यादा हैं।

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