लालू प्रसाद और तमिल मंत्री केएन नेहरू। Image Source : Agencies

तमिल मंत्री बोले- बतौर रेलमंत्री लालू ने जबरदन बिहारियों को नौकरी दी, सिर्फ तिरुचि वर्कशॉप में 4000 बिहारी

New Delhi : तमिलनाडु के नगर प्रशासन मंत्री केएन नेहरू ने आरोप लगाया है कि बतौर रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने बिहारियों के बीच रेवड़ियों की तरह नौकरी बांट दी। विशेष रूप से निचले स्तर की नौकरियों में बिहारियों को ही जगह मिली। कहीं और के लोग हैं ही नहीं। भले ही बिहारी तमिलों की तुलना में कम दिमागी थे। तिरुचि में दक्षिण रेलवे की गोल्डन रॉक कार्यशाला में 4,000 से अधिक बिहारी काम कर रहे हैं। इसी तरह रेलवे क्रॉसिंग पर अधिकांश द्वारपाल बिहारी हैं। यह सब लालू प्रसाद यादव की करतूत का नतीजा है। जब वे रेल मंत्री थे तो उन्होंने अपने सभी साथी बिहारियों को नकल करके रेलवे की परीक्षा उत्तीर्ण करवाई और फिर उन्हें रेलवे की नौकरियों में नियुक्त किया। ये लोग न तो तमिल जानते हैं और न ही हिंदी-अंग्रेजी। हमारे पास दिमाग की कमी नहीं है। फिर भी वे तमिलनाडु में काम कर रहे हैं।

एम.के. स्टालिन की कैबिनेट में केएन नेहरू का कद बेहद मजबूत है। मंत्री रविवार को तिरुचि में द्रमुक कार्यालय में एक रोजगार शिविर को संबोधित कर रहे थे जब उन्होंने यह टिप्पणी की। मंत्री ने यह भी कहा कि तमिलों को भी समान रूप से दोषी ठहराया जाना चाहिये क्योंकि उन्होंने केंद्र सरकार या उसके उपक्रमों में नौकरियों के लिये आवेदन करने में शायद ही कोई झुकाव या पहल दिखाई हो। नेहरू ने कहा- भले ही रेलवे और पीएसयू बैंकों में दस प्रतिशत नौकरियां संबंधित राज्यों के बाहर के उम्मीदवारों के लिये आरक्षित हैं, लेकिन हमारे बहुत कम छात्रों ने इसका लाभ उठाया। केरल के बाद, तमिल युवा दक्षिण में सबसे चतुर हैं और इसलिये उन्हें केंद्र सरकार की इन नौकरियों के लिये और अधिक ईमानदार प्रयास करने चाहिये।
व्यक्तिगत स्तर पर इसका उदाहरण देते हुये मंत्री ने याद किया कि पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि ने उन्हें सांसद बनने और उनकी वरिष्ठता को देखते हुये दिल्ली जाने के लिये कहा था। मंत्री ने कहा- मैंने यह कहते हुए मना कर दिया कि मुझे न तो अंग्रेजी आती है और न ही हिंदी। मुझे अब इसका खेद है।
विपक्ष में रहते हुए डीएमके ने दिल्ली की भाजपा सरकार पर उत्तर भारतीयों को बैंक और रेलवे की नौकरियों में नियुक्त करने का आरोप लगाया था। भले ही उन्हें लिखित परीक्षा पास करने और दस प्रतिशत गैर-राज्य कोटे के माध्यम से नियुक्ति मिली हो। अब वही डीएमके लालू प्रसाद यादव और ‘बाहरी लोगों’ द्वारा हड़पी जा रही इन नौकरियों के लिये आवेदन करने के लिये तमिल युवाओं की अनिच्छा को जिम्मेदार ठहरा रही है।

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