टीका लगाने पहुंची टीम, भागे ग्रामीण, नदी में कूदे : मानमनौव्वल के बाद 1500 लोग में 14 को टीका लगा

New Delhi : कोरोना वैक्सीन को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में इतनी भ्रांतियां हैं कि प्रशासन को उनको समझाने में और उनको वैक्सीन के लिये तैयार करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। अभी तक तो आदिवासी बहुल इलाकों से ही इस तरह की खबरें आ रही थी लेकिन अब उत्तर प्रदेश की लखनऊ के पास बाराबंकी जिले में एक ऐसा मामला आया है, जिसने अफसरों के होश फाख्ता हो गये। पहले तो गांव वाले वैक्सीनेशन प्रोग्राम की खबर सुनने के बाद इधर उधर छिप गये और बाद में जब वैक्सीनेशन टीम और गांव के कुछ लोग उन्हें ढूंढने लगे तो सभी घाघरा नदी में जाकर नहाने लगे। छिप गये। बाहर ही नहीं निकल रहे थे। नदी से ही अफसरों को बोले जा रहे थे ये सुई जिसको लगी वो राम के प्यारे हो जा रहा है। हम लोगों को बख्श दो। काफी समझाने बुझाने के बाद सभी लोग नदी से बाहर निकले। लेकिन टीका नहीं लगवाया। इस पूरे हुड़दंग में अफसरों का भी तमाशा बन गया।
आश्चर्यजनक बात तो यह है कि इस गांव की आबादी करीब 1500 लोगों की है, लेकिन सभी लोग ऐसे हैं जो वैक्सीनेशन के नाम से हड़क जा रहे हैं। उनके अपने ग्रामीण भी उनको समझाने बुझाने में असमर्थ हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिला मुख्यालय से करीब सत्तर किलोमीटर की दूरी पर स्थित रामनगर ब्लॉक के सिसौड़ा गांव की है। जब ग्रामीणों को जानकारी हुई कि वैक्सीनेशन की टीम गांव में पहुंच चुकी है और टीका लगाने के बाद ही जायेगी तो पचीस तीस लोग अपने अपने घरों से गायब हो गये और छिपने लगे। जब अफसरों ने पड़ताल की तो पता चला कि सभी घाघरा नदी पहुंचे हुये हैं। अफसर जब वहां पहुंचे तो सारे ग्रामीण इधर उधर भागने लगे। नदी में कमर भर पानी में घुस गये। और स्नान करने लगे। एसडीएम को काफी मशक्कत करनी पड़ी उनको बाहर निकालने के लिये।
खैर सभी नदी से तो बाहर आ गये लेकिन वैक्सीन लगाने को तैयार नहीं हुये। और अंतत 1500 लोगों के इस गांव में कुल 14 लोगों ने ही वैक्सीन लगवाई। अफसरों को भी समझ में नहीं आ रहा है कि अब करें तो क्या करें। इसका कया रास्ता निकाला जाये।

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