तेजस्वी का हमला- नीतीश सरकार नवंबर माह में चुनाव आयोग द्वारा बिहार पर थोपा गया फंगस है

Patna : बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अक्षम करार देते हुये उनकी कार्यशैली और चुनाव आयोग पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा है कि बिहार के फंगस नीतीश कुमार हैं, जिसके थोपने की जवाबदेही चुनाव आयोग की है। जनता नहीं चाहती थी, फिर भी नीतीश कुमार को थोप दिया। उन्होंने ट‍्वीट कर अपनी भड़ास निकाली है। तेजस्वी यादव ने यह ट‍्वीट न्यूजपेपर दैनिक भास्कर की एक न्यूज की फोटो के साथ किया है। इस न्यूज में बताया गया है कि पटना के अस्पतालों में ब्लैक फंगस की दवा खत्म हो गई है, अगर दवा खत्म हो गई है तो फिर मरीजों का इलाज कैसे किया जा रहा है? न तो पटना एम्स में भर्ती ब्लैक फंगस के मरीजों को दवा दी जा रही है और न ही आईजीआईएमएस में भर्ती मरीजों को दवा मिल पा रही है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दैनिक भास्कर की न्यूज को ट‍्वीट करते हुये लिखा है- नीतीश सरकार नवंबर माह में चुनाव आयोग द्वारा बिहार पर थोपा गया फंगस है। जनता का निर्णय बदल चुनाव आयोग को अपना “नतीजा” सुनाना बिहार को महँगा पड़ रहा है। अधिकारियों के भेष में चुनाव आयोग में घुसपैठ कर सिस्टम में बैठे भाजपाई कठपुतलियों को उसका ईनाम भी मिला। उनके इस ट‍्वीट के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री का ट‍्वीट भी आया जो उसी न्यूज को लेकर किया गया। राबड़ी देवी ने ट‍्वीट किया – बड़बोलो की बड़बोली ड़बल इंजन सरकार है ना..जी?? ऊपर मोदी नीचे नीतीश…फिर भी फ़ंगस की दवा नहीं?? जोर-जोर से जंगलराज का उच्चारण करो, तभी ना नीतीश-मोदी दवा का प्रबंध करेंगे?
इससे पहले उन्होंने जातीय जनगणना को लेकर अपने पिता और राजद के कर्तार्धा लालू प्रसाद के आवाज में आवाज मिलाई। उन्होंने ट‍्वीट किया- जातीय जनगणना के वास्तविक आँकड़े ज्ञात होने पर ही पता चलेगा कि जीविकोपार्जन के लिए विभिन्न जातियों के लोग क्या करते हैं और उनके सामाजिक आर्थिक हालात क्या है? वस्तुस्थिति ज्ञात होने पर ही उनके उत्थान और विकास संबंधित योजनाएँ बनाई जा सकेंगी।
वैसे लालू प्रसाद यादव ने अपने चुटीले अंदाज में अपनी बात को रखा। उन्होंने अपना ही एक पुराने ट‍्वीट को रीट‍्वीट किया। 29 दिसंबर 2019 के इस ट‍्वीट में लालू प्रसाद ने लिखा था- केंद्र सरकार जनगणना में कुत्ता-बिल्ली, हाथी-घोड़ा, सियार-सुअर सब की गिनती करती है तो पिछड़े और अतिपिछड़ों की गिनती करने में क्या परेशानी है? जनगणना में एक अलग जाति का कॉलम जोड़ने में क्या दिक्कत है? क्या जातिगत जनगणना करेंगे तो 10% की 90 प्रतिशत पर हुकूमत की पोल खुल जायेगी? उन्होंने फिर कल इसे रीट‍्वीट करते हुये लिखा- जब जनगणना में किस धर्म के कितने लोग है इसकी गिनती होती है तो जातीय गणना करने में क्या अड़चन है?

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