अंग्रेजों ने 1894 में पुनपुन पर पुल बना फतुहा को जोड़ा था, हमने मनाही के बाद भी हेवी ट्रक दौड़ा तोड़ दिया

New Delhi : बिहार में आजकल सबकुछ उलटा पुलटा हो रहा है। लॉकडाउन में ऐसी-ऐसी वारदातें हो जा रही हैं जिसकी कल्पना भी मुश्किल है। गुरुवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। पूरा प्रदेश जहां कोरोना महामारी की वजह से संपूर्ण लॉकडाउन से परेशान है। लोग पैदल चलने से भी परहेज करते हैं। वहीं एक ओवरलोडेड ट्रक फतुहा में पुनपुन नदी पर बने 127 साल पुराने पुल का तोड़ डाला। शहर के दो हिस्सों को जोड़नेवाला यह इकलौता पुल है। गुरुवार दोपहर की इस घटना के बाद सड़क पर लोगों का हुजूम उतर आया। खासकर मेन मार्केट के लोग जो बाकी हिस्से से पूरी तरह से कट गये। इस मामले में दो सवाल हैं, जिन पर जरूर गौर करना चाहिये। पहला सवाल कि 127 साल में बिहार सरकार इसके समान्तर या इसको रिप्लेस करते हुये न तो नया पुल बना सकी और न ही इस पुल की देखरेख ही इस स्तर पर हुई कि यह भारी वाहनों को झेल सके। देखने में तो चकाचक थी। लेकिन स्वभाविक है अंग्रेजों ने गांव के लिये यह पुल बनाया था और अब वहां पूरा शहर बस चुका है।

इस पुल की देखरेख का जिम्मा पथ निर्माण विभाग के पास ही था। और पथ निर्माण विभाग को पता था कि पुल बहुत कमजोर हो गया है। हेवी लोड सह नहीं पायेगा। यह जानते हुये भी पथ निर्माण विभाग ने नया पुल बनाने की पहल तो कभी नहीं की अलबत्ता हेवी व्हेकिल का इस पर प्रवेश जरूर वर्जित कर दिया। पुल पर सिर्फ छोटी गाड़ियां ही चल सकती थीं। सामान्य दिनों में तो यहां ट्रक का पहुंचना भी मुश्किल था लेकिन लॉकडाउन में जब पब्लिक कोरोना के भय से घरों में दुबकी हुइ है तो ट्रकवाले फर्राटा भरते हुये पुल क्रास करने के लिये पहुच गये।
बड़ी बात यह है कि इस ट्रक को पुलिस और प्रशासन के लोगों ने भी नहीं रोका। अब पुलिस कह रही है कि अगर इस मामले में पथ निर्माण विभाग की ओर से शिकायत की जायेगी तो पुलिस ट्रक मालिक और चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई करेगी। फिलहाल तो स्थिति है कि ट्रक की ट्रॉली त्रिपाल से ढंकी हैं और उसमें हेवी लोड है। चूंकि पुल उस ट्रक का वजन नहीं उठा सका तो ट्रक पुल के टूटते ही नदी में जा गिरा। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
बताते हैं कि यह पुल अंग्रेजों ने 1894 में पुनपुन नदी पर बनवाया था। पुल का दक्षिणी हिस्सा पूरी तरह से क्षितग्रस्त हो गया है। अब इस पुल के टूट जाने से फतुहा के एक बड़े हिस्से को मौजिपुर हाट के रास्ते घूमकर आना पड़ेगा। फतुहा बाजार जाना समसपुर के लोगों के लिये मुसरबत बन गया है। जब यह घटना हुई तो पुलिस और प्रशासन को कोसते हुये लोगों की भारी भीड़ सड़क पर उतर आई।

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