यह मकान मध्य प्रदेश के बैतूल में बनाया गया है और इसे इस योजना के तहत आदर्श मकान के तौर पर देखा जा सकता है।

पक्के घर का सपना होगा साकार : 11.50 लाख लोगों को पक्का मकान बनाने के लिए सरकार देगी पैसा

पटना : इस बार बिहार सरकार गरीब लोगों का घर बनाने पर विशेष ध्यान देनेवाली है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए चल रही प्रधानमत्री आवास योजना के तहत 11.50 लाख लोगों को पक्का मकान बनाने के लिए करीब सवा लाख रुपये दिया जायेगा। सरकार की ऐसी मान्यता है कि इस धनराशि से गरीब अपना दो कमरे का मकान पक्का कर सकते हैं। इसमें साठ फीसदी की सब्सिडी केंद्र सरकार देती है और बाकी राज्य सरकार। इस बार इस योजना के तहत यह बात भी बेहद अच्छी है कि बिहार को केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत सर्वाधिक यूनिट स्वीकृत करके दिए हैं। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार सरकार का पूरा ध्यान ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर केन्द्रित है। बिजली, सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं सौ फीसदी मुहैया करने के बाद सरकार का सपना है सबको पक्का मकान। हम हर गरीब को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनका पक्का मकान बनकर रहेगा।

वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बिहार को 11 लाख 49 हजार 947 आवास बनाने की स्वीकृति (आवंटन) केंद्र ने दे दी है। अब राज्य के इतने नए लोगों का इस योजना से आवास बन सकेगा। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस संबंध में शुक्रवार को बताया कि देश में सबसे अधिक बिहार के लिए इस साल आवास बनाने का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य के गांव के गरीब आवास विहीन योग्य परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने के लिए अनुदान के रूप में एक लाख 20 हजार एवं उग्रवाद प्रभावित 11 जिलों में एक लाख 30 हजार दिये जाते हैं। इनमें 60 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार द्वारा तथा 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जाती है। मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 तक सबके लिए आवास को लक्ष्य बनाकर इस योजना पर काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत बनाये गये स्थायी प्रतीक्षा सूची के सभी परिवारों को राज्य में आवास उपलब्ध करा दिया गया है। पर, सर्वेक्षण में राज्य के लगभग 32 लाख 57 हजार 990 ऐसे परिवार पाये गये थे, जिनका नाम स्थायी प्रतीक्षा सूची में नहीं था। ऐसे परिवारों की सूची करीब तीन वर्ष पूर्व केन्द्र सरकार को आवास एप प्लस पर भेजा गया था। इसमें से लगभग 30 लाख 81 हजार 494 परिवार योग्य पाये गये। ऐसे परिवारों के लिए ही वर्त्तमान वित्तीय वर्ष का यह लक्ष्य दिया गया है।

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