अनूठी सुगंध-स्वाद के साथ लंदन को भेजी गई बिहार से भागलपुर के जर्दालु आम की सौगात

Patna : शाही लीची के बाद अब समय है जर्दालु आम का। बिहार के इस बेहद खास आम को ब्रिटेन भेजा गया है। अब लंदन के लोग भी भागलपुर के जर्दालु आम के मजे ले सकेंगे। खासबात यह है कि यह पहली बार है जब जर्दालु आम विदेशों में व्यापार के दृष्टिकोण से भेजे जा रहे हैं। ऐसी उम्मीद है कि इससे आनेवाले समय में इस कारोबार को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। कृषि विभाग और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के प्रयास से ऐसा संभव हो सका है। पहली खेप में भागलपुर की पहचान जर्दालु एक हजार किलोग्राम लंदन भेजा गया है। जर्दालु आम के इस खेप को भागलपुर से दिल्ली रवाना किया गया है, जहां से इसे लंदन के लिये रवाना किया जायेगा। यह बिहार में कृषि क्षेत्र में हुये अब तक के सबसे बड़े बदलवों में से एक है। कहां कोई बिहार में रहनेवाला व्यक्ति सोच भी पाता है कि उसके कृषि उत्पाद विदेश भेजे जा सकेंगे। लेकिन यह पहली शुरुआत बेहद शानदार है।

इससे पहले इसी वर्ष एक हजार किलोग्राम शाही लीची को लंदन निर्यात किया गया था। सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने हरी झंडी दिखाकर जर्दालु आम लंदन के लिये भेजा। एपीडा के अध्यक्ष डॉ. एम. अंगामुथ्थु, कृषि सचिव डॉ. एन सरवण कुमार और एपीडा के डॉ. सुधांशु, डॉ. मौर्या विजय चंद्रा आदि इस वर्चुअल प्रोग्राम में मौजूद थे। इस मौके पर लोगों ने कृषि क्षेत्र की संभावनाओं पर भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा की। बिहार में कृषि उपजों की पहचान पर भी बातचीत हुई।
यह बात उल्लेखनीय है कि जर्दालु आम बिहार में मुख्यरूप से भागलपुर में ही होता है। भागलपुर की क्वालिटी बेस्ट होती है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो भागलपुर में करीब 1200 हेक्टेयर में जर्दालु आम के बाग हैं। इसके अलावा बांका और मुंगेर में 700 हेक्टेयर में जर्दालु आम का बाग हैं। एक पेड़ से औसतन 1500 से 2000 फल मिलते हैं। प्रति हेक्टेयर उपज 12.15 टन होता है। कुल उत्पादन 10 हजार टन होता है।
बिहार सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार अनूठी सुगंध और स्वाद के साथ बिहार के भागलपुर जिले के जर्दालु आमों को 2018 में जीआई प्रमाणन हासिल हुआ था। एपिडा गैर पारम्परिक क्षेत्रों से आम के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिये कदम उठा रहा है। हाल में, बहरीन में भारतीय आमों के प्रचार के लिये एक सप्ताह लंबे कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां तीन जीआई प्रमाणित खीरसपाती और लक्ष्मणभोग (पश्चिम बंगाल) और जर्दालु (बिहार) सहित फल की 16 किस्मों का आयातक अल जजीरा समूह के सुपर स्टोरों में प्रदर्शन किया गया।
एपिडा आम के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए वर्चुओल खरीदार-विक्रेता बैठक और महोत्सव का आयोजन करता रहा है। एपिडा ने हाल में भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर बर्लिन, जर्मनी के साथ ही जापान में आम महोत्सव का आयोजन किया था। एपिडा ने भारतीय दूतावास, सियोल और कोरिया में इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स के साथ भागीदारी में मई, 2021 में एक वर्चुअल खरीदार विक्रेता बैठक का आयोजन किया था। वर्तमान में जारी कोविड-19 महामारी के कारण, भौतिक रूप से निर्यात संवर्धन कार्यक्रमों का आयोजन संभव नहीं था। एपिडा ने भारत और दक्षिण कोरिया के निर्यातकों व आयातकों को एक मंच उपलब्ध कराने के लिए एक वर्चुअल बैठक का आयोजन किया था। भारत ने आंध्र प्रदेश के कृष्णा और चित्तूर जिलों के किसानों से खरीदी गई जीआई प्रमाणित बंगनापल्ली और आमों की एक अन्य किस्म सुरवर्नरेखा की खेप का निर्यात किया।

दक्षिण कोरिया को निर्यात किये गये आमों को तिरुपति, आंध्र प्रदेश स्थित एपिडा द्वारा सहायता प्राप्त और पंजीकृत भाप आधारित ट्रीटमेंट फैसिलिटी पैकहाउस से उपचारित और साफ आपूर्ति की गई। वहीं इफ्को किसान सेज (आईकेएसईजेड) द्वारा इसका निर्यात किया गया। यह आईकेएसईजेड द्वारा निर्यात की गई पहली कन्साइनमेंट है, जो 36,000 समितियों की सदस्यता वाली कई राज्यों में सक्रिय सहकारी संस्था इफ्को की एक सहायक है।

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