बिहार के किशनगंज जिले से सटे न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत में प्रवेश किये 10 रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया था। ये सभी अगरतला-नई दिल्ली राजधानी स्पेशल ट्रेन से दिल्ली जा रहे थे। इनमें तीन पुरुष, दो महिलाएं और पांच बच्चे शामिल थे। Image Source : Agencies

उच्च न्यायालय ने नीतीश सरकार से पूछा- विदेशियों के लिये डिटेंशन सेंटर कब तक बनाओगे?

Patna : प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर उच्च न्यायालय ने आज बड़ा आदेश जारी कर दिया है। उच्च न्यायालय के रुख से साफ है कि बांग्लादेशी मुस्लिमों का बिहार में छिपकर रहने का कारनामा अब ज्यादा समय तक नहीं चल सकेगा। उच्च न्यायालय ने कुछ सवालों के जवाब नीतीश कुमार सरकार से तलब किये हैं। मुख्य रूप से- प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के बारे में राज्य सरकार क्या कर रही है? इन लोगों को रखने के लिये सरकार कहां और कब तक स्थाई डिटेंशन सेंटर बनायेगी? परमानेंट डिटेंशन सेंटर में क्या सुविधाएं दी जायेंगी? ये सवाल शामिल हैं। पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इन बातों की पूरी जानकारी दो हफ्ते के अंदर देने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से जानना चाहा कि क्या उन्हें राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के बारे में कोई जानकारी है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि अवैध विदेशियों को रखने के लिये सरकार की क्या व्यवस्था है। अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान के लिये लोगों को जागरूक करने के संबंध में क्या कदम उठाये गये हैं। अदालत ने सरकार को अखबार में विज्ञापन प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को लोगों को यह जानकारी देने का काम करना चाहिये कि लोग विदेशियों के अवैध रूप से रहने की शिकायत कहां करें।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि फिलहाल विदेशियों को रखने के लिये हाजीपुर में अस्थाई डिटेंशन सेंटर बनाया जायेगा। बाद में सरकार स्थायी डिटेंशन सेंटर बनायेगी। सरकार ने यह भी बताया कि अवैध रूप से आई तीन बांग्लादेशी महिलाओं को निर्वासित कर दिया गया है। किसी भी देश में अवैध अप्रवासियों (दूसरे देशों के नागरिकों) को रखने के लिये जो जगह बनाई जाती है, उसे डिटेंशन सेंटर कहा जाता है।
पटना हाईकोर्ट ने 22 जुलाई को बांग्लादेश से अवैध रूप से आई तीन महिलाओं को बिहार वापस भेजने के मामले में सुनवाई की थी। इस मामले पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने मरियम खातून की याचिका पर कहा कि जेल में डिटेंशन सेंटर नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने अलग डिटेंशन सेंटर बनाने के मामले में राज्य सरकार को अगली सुनवाई में जवाब देने का निर्देश दिया है।

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