निरंजना नदी पर बन रहा पुल बह गया। Image Source : Screengrab from viral video

बारिश आई, बह गया पुल : 13 करोड़ में 6 साल से बन रहा सुशासन का पुल पानी में गल गया!

Patna : बारिश आई, बह गया पुल। जी हां, बिहार में एक और निर्माणाधीन पुल बारिश की धार की शिकार हो गई। 13 करोड़ की लागत से पिछले कई वर्षों से आम लोगों के मन में बन जाने की आस जगा रहा यह पुल बनता, उससे पहले ही बह गया। इस तरह हम इंद्रदेव के शुक्रगुजार हो सकते हैं, जिन्होंने करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे खोखले पुल की पोल खोल कर रख दी। और वहां कुछ बच्चों ने इस पुल के बह जाने, गिर जाने का वीडियो भी बना लिया। गया के डोभी प्रखंड के कोठवारा वरीया गांव के पास निरंजना नदी पर यह पुल बन रहा है। पर मामूली पानी की धार में ही नदी में भरभरा कर ढह गया। यह पुल पिछले 6 सालों से बन रहा है। आज तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य के नाम पर अब तक नदी में सिर्फ 16 पिलर ही खड़े किये जा सके हैं।

टूटा हुआ पुल। यह पिछले छह साल से बन रही है। पर आज तक बनी नहीं। ग्रामीण शिकायत करते हैं, घटिया निर्माण की लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।

दरअसल यह पुल के भरभरा कर गिरने के वीडियो की स्टोरी नहीं है। यह कहानी है अंदर ही अंदर हमारे सिस्टम में फैल रहे सड़ांध और दलाली की उस घुन की जिसने सबकुछ खोखला कर दिया है। पुल के गिरने की खबर चारों तरफ बड़ी तेजी से फैल गई है। सब आ रहे हैं इस पुल को देखने। उसके अवसान की कहानी सुनने और कोसने सरकार को। इसके टूट जाने का वीडियो पूरे इलाके में शेयर किया जा रहा है। पुल का शिलान्यास 2015 में क्षेत्र के पूर्व विधायक विनोद यादव के हाथों किया गया था। पुल निर्माण की लागत 13 करोड़ रुपये अनुमानित है। इसके निर्माण कार्य की जिम्मेदारी तिरुपति बाला जी कंस्ट्रक्शन कंपनी को दी गई है। पुल के निर्माण कार्य में प्रयोग में लाई जा रही सामग्रियों को लेकर यह पुल शुरुआत के दिनों से ही विवादों में घिरा रहा है।
आसपास के ग्रामीणों ने घटिया निर्माण सामग्री का हवाला देते हुये जमकर विरोध भी जताया था। लोगों ने प्रदर्शन भी किया था। घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किये जाने की शिकायत क्षेत्र के पूर्व विधायक से भी की गई थी। इसकी वजह से कई बार निर्माण को रोकना पड़ा। योजना में देरी हुई लेकिन सूरत नहीं बदली। दुष्यंत कुमार ने लिखा था- सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिये। पर गया के इस इलाके में दुष्यंत कुमार फेल दिख रहे हैं। कहीं कोई सूरत नहीं बदली है। शासन और राजनीति साथ-साथ चल रही है। और जनता, यहां के निरीह लोग टकटकी लगाये हैं, कि आज नहीं तो कल कुछ ठीक हो जायेगा।
ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी की तरफ से बस अब गार्ड रहते हैं। काम नहीं हो रहा है, कई महीनों से तो मजदूर, कर्मचारियों के रहने का सवाल ही नहीं है। कोठवारा के ग्रामीणों ने बताया कि पुल के गिरने की सूचना प्रखंड कार्यालय को दी गई है। फिलहाल मौके का मुआयना करने कोई नहीं पहुंचा है।

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