बिहार की ये खास बात पीएम मोदी को आई रास, क्या हर बिहारी को है इसकी जानकारी?

बिहार
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में बिहार को लेकर एक ऐसी बात का ज़िक्र किया है जो शायद किसी बिहारी को भी न पता हो। दरअसल पीएम मोदी ने बिहार के पश्चिम चंपारण जिला के थरूहट में थारु जनजाति समाज के लोगों की एक परंपरा का ज़िक्र किया है। ये जनजाति समाज सदियों से एक ऐसी परंपरा का पालन कर रहा है, जिसे आज करोना काल में हम सभी को फॉलो करना पड़ रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या है। एक बार दिमाग पर जोर डाल ही लीजिए। खैर। अगर आपको याद नहीं आ रहा तो कोई बात नहीं। यहां हम आपको इसी की जानकारी दे रहे हैं।

तो चलिये आप को अब इस परंपरा के बारे में बताते हैं। कोरोना महामारी में आज हम सब लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं, लेकिन बिहार के थारु समाज के लोग सदियों से 60 घंटे के लॉकडाउन का पालन करते आ रहे हैं। अगर यही चीज़ आपको उनकी भाषा में बताएं तो वे ’60 घंटे के बरना’ का पालन करते हैं।

क्या है ’60 घंटे का बरना’ ?
थारु समाज के लोग प्रकृति प्रेम के कारण यह 60 घंटे का बरना यानी लॉकडाउन की परंपरा को सदियों से अपनाए हुए हैं। आपको बता दें कि पेड़ पौधों की सुरक्षा के लिए थारु समाज के लोग हर साल सावन माह के अंतिम सप्ताह में 60 घंटे का लॉकडाउन करते हैं। इस अवधि के दौरान वे पेड़ पौधों की पुजा अर्चना करते हैं । इस दौरान किसी तरह की भीड़ या शोर नहीं किया जाता है । इतना ही नहीं बल्कि इस अवधि के दौरान थारु समाज के लोग घास तक नहीं काटते हैं । इसे वे बरना पूजा भी कहते हैं । इस दौरान वे आवाजाही बंद कर अपने घरों के भीतर ही भगवान और पेड़ पौधों की पूजा करते हैं ।

क्या है मान्यता ?
करीब ढाई लाख से ऊपर की संख्या में थारु आदिवासी 60 घंटे के बरना को एक पर्व की तरह मनाते हैं। मान्यता है कि बरसात में प्रकृति की देवी पौधे सृजित करती हैं। इसलिए गलती से भी धरती पर पांव पड़ने से कोई पौधा समाप्त न हो जाए, इसलिए 60 घंटों तक कोई भी व्यक्ति अपने घरों से बाहर नहीं निकलता है और ना ही किसी व्यक्ति को बाहर से गाँव में प्रवेश करने की अनुमति होती है ।

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