तेज प्रताप बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करते हुये। Image Source : tweeted by @TejYadav14

तेज प्रताप की विधायकी पर खतरा, संपत्ति के बारे में गलत सूचना दी चुनाव आयोग को!

Patna : बिहार में सत्तारूढ़ जदयू के एक समर्थक ने लालू प्रसाद के लाल और राजद विधायक तेज प्रताप यादव की सदस्यता को चुनौती देते हुये गुरुवार को पटना उच्च न्यायालय का रुख किया। याचिकाकर्ता विजय कुमार यादव ने आरोप लगाया कि तेज प्रताप यादव ने 2020 के विधानसभा चुनाव में समस्तीपुर के हसनपुर निर्वाचन क्षेत्र से अपने नामांकन पत्र में अपनी चल और अचल संपत्ति से संबंधित गलत जानकारी प्रस्तुत की थी। यादव ने कहा – राष्ट्रीय जनता दल के विधायक तेज प्रताप ने नामांकन पत्र में संपत्ति के बारे में गलत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने ऐसा करके चुनाव आयोग और प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को धोखा दिया। उन्होंने पूरी चुनावी प्रक्रिया को गुमराह किया है। इसलिए, मैंने अदालत से उनकी सदस्यता रद्द करने और उनके प्रतिद्वंद्वी राजकुमार राय को विजेता घोषित करने का अनुरोध किया है। राजकुमार राय ने जदयू टिकट पर चुनाव लड़ा था।

तेज प्रताप यादव के वकील जगन्नाथ सिंह ने कहा- याचिकाकर्ता ने तेज प्रताप यादव को चुनौती देने के लिये जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 100 के तहत मामला दर्ज किया है। हम गहन अध्ययन के बाद जवाब दाखिल करेंगे। बता दें कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव एक बार फिर से काफी सक्रिय हो गये हैं। वे दिल्ली में तमाम तरह के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। घर से निकल रहे हैं। उन्हीं के सक्रिय होने के बाद 7 अगस्त को मंडल आयोग की सिफारिशों को सौ फीसदी प्रभावी बनाने की डिमांड को लेकर पूरे बिहार में राजद सड़क पर उतरने वाला है। राजद ने जातीय जनगणना के मसले पर भी भारतीय जनता पार्टी को बुरे तरह से घेर लिया है। जातीय जनगणना के मसले पर जदयू भी राजद का विरोध नहीं कर सका है, क्योंकि इस मसले पर बड़ा वोट बेंक जुड़ा है।
विश्लेषकों का ऐसा अनुमान है कि यह मामला भारतीय जनता पार्टी के गले की हड‍्डी बन सकता है। इसका असर उत्तर प्रदेश के चुनावों में भी पड़ सकता है। बिहार चुनाव में तो इसका असर पड़ना तय ही है। इन परिस्थितियों में राजद को स्थिर करने और घेरने की योजनाओं भाजपा ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

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