बिहार में गांव के घरों को गेस्ट हाउस बनाने की तैयारी, यूं होगी गांवों में कमाई

बिहार सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए और गांवों में रोजगार सृजन करने के लिए अब पर्यटकों को गांवों में ही “होम स्टे” की सुविधा देने जा रही है। इससे पर्यटक एक गाँव में जीवन जीने का भी अनुभव ले सकेंगे। सरकार इसकी व्यवस्था पर्यटन केंद्रों के समीप बसे गांवों में करने की योजना बना रही है। इस प्रोजेक्ट का नाम भी ‘होम स्टे’ रखा गया है।

गांव के घरों को किया जाएगा विकसित

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नई योजना के तहत, ग्रामीणों के घरों को विकसित कर गेस्ट हाउस का रूप दिया जाएगा और पर्यटकों को होटलों के बजाय ग्रामीणों के घरों में रहने की पेशकश की जाएगी। ये घर आकर्षक और स्वच्छ होंगे, जिसमें बिजली और संलग्न बाथरूम जैसी सुविधाएं होंगी।

ग्रामीणों और पर्यटकों दोनों के लिए होगा फायदेमंद

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बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रभाकर ने कहा कि यह योजना पर्यटकों और ग्रामीणों दोनों के लिए फायदेमंद होगी। जहां ग्रामीण अपने घर आने वाले मेहमानों को घर की पेशकश करके पैसा कमाएंगे, वहीं पर्यटकों को ग्रामीणों के साथ घुलमिल कर रहने और उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानने का एक नया अनुभव मिलेगा।

राजगीर और बोध गया से होगी शुरुवात

Registration

पायलट प्रोजेक्ट के तहत सबसे पहले राजगीर और बोध गया के आसपास के गांवों को विकसित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार इसके लिए अजेंसी का चयन भी किया जा चुका है। प्रारूप तैयार कर लिया गया है। अब बस सरकार से अनुमति मिलने की देरी है। संभवतः इसपर काम इसी माह से शुरू भी कर दिया जाएगा।

क्या होगी प्रक्रिया

The Story of the Mud Houses of Bihar | AaoBihar

जिस एजेंसी को इस काम के लिए चुना गया है वह पहले पर्यटन केंद्रों के पास बसे गांवों का निरीक्षण करेगी। पायलट प्रोजेक्ट के लिए ऐसे गाँव को चुना जाएगा जो पर्यटन केंद्र के समीप और वहाँ आने जाने का रास्ता भी बढ़िया हो। उसके बाद ग्रामीणों से आवेदन करने को कहा जाएगा। जो ग्रामीण होम स्टे योजना में रुचि लेंगे उनके घरों का निरीक्षण भी किया जाएगा और साथ ही सभी व्यवस्थाओं की भी जांच की जाएगी। इसके बाद ही होम सटे के लिए घर को फाइनल किया जाएगा।

इसके लिए ग्रामीणों को भी परीक्षण दिया जाएगा कि उन्हें पर्यटकों से कैसे व्यवहार करना है और कैसे बात करनी है। इसमे पर्यटकों के खाने पीने और परिवहन जैसी सुविधाओं के लिए भी ग्रामीणों की मदद ली जाएगी। ताकि अधिक से अधिक रोजगार का सृजन हो सके।

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